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उत्तर प्रदेशकृषिवाराणसी

प्रसिद्ध सब्जी वैज्ञानिक डॉ राजेश कुमार IIVR के निदेशक का कार्यभार संभाला

सुशील कुमार मिश्रा

वाराणसी । भारतीय सब्जी अनुसन्धान संस्थान स्थित अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना (सब्जी फसल) के परियोजना समन्वयक डॉ राजेश कुमार ने भा. कृ.अनु.प.- भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आई आई वी आर), वाराणसी के निदेशक का कार्यभार ग्रहण किया है। अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना (सब्जी फसल) के परियोजना समन्वयक रहे। डॉ राजेश कुमार सब्जी अनुसन्धान में  उत्कृष्ट कार्यों  के साथ महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया है। डॉ कुमार का जन्म 1974 में वाराणसी जनपद में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा-दीक्षा चन्द्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर (बी.एससी.) तथा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से ग्रहण की। अपने करियर की शुरुआत 1999  में आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी में वैज्ञानिक के पद से की थी। डॉ राजेश कुमार ने विशिष्ट गुणों वाली सब्जियों की 11 किस्मों/संकर किस्मों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसमें टमाटर में 4, मिर्च में 05 (03 किस्में और 02 संकर) और मटर में 02 किस्में शामिल है।

इसके अलावा डॉ कुमार चार आनुवंशिक स्टॉक (तीन टमाटर और एक मिर्च) के विकास से भी जुड़े रहे हैं। डॉ कुमार ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में कई शोध लेख प्रकाशित किए हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों की वजह से उन्हे राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (नास), नई दिल्ली, यूपी कृषि विज्ञान अकादमी (यूपीएएएस), भारतीय बागवानी विज्ञान अकादमी (आईएएचएस) और भारतीय सब्जी विज्ञान सोसायटी (आईएसवीएस) के फेलो सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्त्तमान में वह परियोजना समन्वयक के पद पर देश भर में स्थित 36 नियमित और 24 स्वैच्छिक केन्द्रों पर सब्जी शोध कार्यों का निर्देशन एवं समन्वयन कर रहे थे । कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा चयनित होने एवं  निदेशक के पदभार  ग्रहण करने पर  संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है । डॉ. राजेश ने कहा कि आधुनिक तकनीक जैसे जीनोम एडिटिंग, क्रिस्परकैश 9, मॉलिक्यूलर मार्कर्स आदि का प्रयोग कर जलवायु सहिष्णु, गुणवक्ता युक्त व कीट एवं रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का विकास एवं अल्पदोहित सब्जियों में सुधार कर उन्हें मुख्य सब्जी शोध की धारा में शामिल करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी ।

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