वाराणसी:वृक्षों ने एकजुट होकर चीत्कार मार्च निकाला

जंगल में न सही, तो मुहल्ले में तो हमे रहने दो “छाया और फल देंगे, ऑक्सीजन तो हर वक्त”
तुम मुझे जीवन दो, हम तुम्हें सांसों का उपहार देगें
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विशाल भारत संस्थान ने वृक्षों को मानवीय भावनाओं के साथ उनके दर्द को उजागर करने के लिए वृक्ष चीत्कार मार्च निकाला। जहां सभी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, वहीं वर्षों से वृक्ष भी अत्याचार सह रहे हैं, जबकि इनका जीवन मानव सभ्यता के लिए है। बावजूद इसके इंसान इन वृक्षों को खत्म करने पर तुला हुआ है। जब इनकी नहीं सुनी गई, तो तब थक हारकर वृक्षों ने अपना यूनियन बना लिया। वृक्षों के नवनिर्वाचित अध्यक्ष पीपल पाण्डेय ने कहा कि “हम धरती पर आये ही हैं दूसरों के जीवन को बचाने के लिए। ऑक्सीजन न दें तो इंसान सांस न ले पाए। एक इंसान को जीवन भर में करोड़ों रूपये का ऑक्सीजन देते हैं, फिर भी हमें काट दिया जा रहा है। इन्हीं इंसानों के पूर्वज हमारी पूजा करते थे, जब तक हम पूजे गए, तब तक ऑक्सीजन के लिए पैसा नहीं देना पड़ा। बंद करो आरी का वार, नहीं सहेंगे अत्याचार। कटहल गुप्ता, बरगद सिंह, जामुन चौबे ने कह दिया कि अब जंगल खत्म कर रहे हो तो गांवों और मुहल्लों में तो रहने दो। इस अवसर पर विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि वृक्ष यूनियन के माध्यम से वृक्षों के दर्द को उजागर किया जाएगा। ये पेड़ पौधे हमारे परिवार और जीवन का हिस्सा हैं। इनको अलग करना मतलब अपने जिंदगी से खिलवाड़ करना है। पौधा न लगाओ लेकिन काटो तो मत। पूर्वजों के रास्तों पर चलकर हम पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा कर सकते है।




