देवरिया: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मदद से विदेश में फंसे मजदूर की दिपावली के दिन हुई देश वापसी

असगर अली
देवरिया।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मदद से विदेश में फंसे मजदूर की दिपावली के दिन हुई देश वापसी देवरिया जनपद के तरकुलवा थाना क्षेत्र के ग्राम सीधाये की रहने वाली पीड़िता द्रोपती देवी का जीवन बीते कुछ महीनों से संकट में था। उनके पति बृजेश गोंड सात महीने पहले बेहतर भविष्य की तलाश में एजेन्ट के माध्यम से दुबई गए थे। लेकिन जिस कंपनी में वे कार्यरत थे, कम्पनी के मालिक द्वारा बृजेश गौड़ से श्रम कराते थे और वेतन नही देते थे। वहां से उन्हें सात महीनों से वेतन नहीं मिला। घर पर तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी, सीमित साधन और कोई स्थायी आय न होने से पीड़िता द्रोपती देवी का जीवन अत्यंत कठिन हो गया। आखिरकार 24 सितम्बर 2025 को उन्होंने अपनी पीड़ा लेकर थाना कोतवाली में एक आवेदन प्रस्तुत किया। थाना कोतवाली में कार्यरत पी0एल0वी0 मनोज कुमार सिंह द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री मनोज कुमार तिवारी को पीड़िता द्रोपदी के आवेदन पत्र के सम्बन्ध में अवगत कराया गया, जिसपर सचिव द्वारा पी0एल0वी0 को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर पीड़िता की हर सम्भव मदद करने हेतु आदेशित किया गया। पी0एल0वी0 मनोज कुमार सिंह द्वारा पीड़िता के आवेदन को थाना प्रभारी कोतवाली के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसपर थाना प्रभारी कोतवाली द्वारा मामलें को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई। एजेंट अजय चैरसिया, जिनका कार्यालय सीसी रोड पर स्थित है, को मौके पर बुलाया गया। उसी समय कोतवाली उपनिरीक्षक श्री अजय तिवारी और आरक्षी श्री केशनाथ यादव (पी0एन0ओ0 162770865) ने पीड़िता के पति बृजेश गोंड की कंपनी के मालिक से बातचीत की। कंपनी के प्रतिनिधि ने आश्वासन दिया कि 15 दिनों के भीतर बकाया वेतन और पीड़िता के पति बृजेश गोड़ को भारत भेज दिया जायेगा। दिनांक 20.10.2025 को दीपावली के दिन जब पीड़िता के पति बृजेश गोंड अपने परिवार के पास लौटे, तो उनके चेहरे पर उल्लास और राहत दोनों झलक रहा था। पीड़िता द्रोपती देवी की आंखों से भी खुशी के आँसू छलक पड़े। सचिव ने परिवार से मुलाकात कर, पीड़िता के पति बृजेश गोंड को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। सचिव द्वारा पी0एल0वी0 मनोज कुमार सिंह के इस कार्य की बहुत प्रशंसा की और इसी प्रकार लोगों की विधिक सहायता देने हेतु प्रोत्साहित किया। दीपावली के उस दिन पीड़िता द्रोपती देवी के घर में सिर्फ दीप की लौ ही नहीं, बल्कि उम्मीद, न्याय और विश्वास का उजाला भी जगमगाया।




