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वाराणसी

निष्क्रिय संगठन को वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर सक्रिय करने का  करें प्रयास: रवि सर्राफ

सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी। काशी के सर्राफा व्यापारियों के हितों के उद्देश्य को लेकर 1963 में स्थापित श्री काशी सर्राफा मंडल विगत कई वर्षों से मृतप्राय पड़ा था। इस मंडल के छाया में काशी के सर्राफा व्यापारी अपने आप को संरक्षित व सुरक्षित रखे हुए थे। मगर विगत कुछ वर्षों से श्री मंडल के पदाधिकारी निष्क्रिय हो गए साथ ही विगत कई वर्षों से संस्था का नवीनीकरण भी नहीं हो पाया था। सर्राफा मार्केट के वरिष्ठ साथियों ने कहा कि श्री मंडल काशी की प्रतिष्ठित पुरानी संस्था है, इसका नवीनीकरण कराने के पश्चात लीगल तौर से चलाना चाहिए। लीगल एडवाइजर से विचार विमर्श करने के पश्चात यह ज्ञात हुआ कि इसका नवीनीकरण संभव नहीं है, क्योंकि लगभग 25 वर्षों से संस्था का न तो और रीनिवल हो पाया था और ना ही ऑडिट हो पाई थी। अतः उसी नाम से ही वरिष्ठ साथियों के साथ विचार विमर्श कर नया रजिस्ट्रेशन कराया गया। श्री काशी सर्राफा मंडल के नए अध्यक्ष रवि सर्राफ ने अपने प्रतिष्ठान पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे सर्राफा बाजार के देवतुल्य व्यापारी व सदस्य किसी भी भ्रामक बहकावे में न आवें अन्य किसी के द्वारा बुलाई गई बैठक में सम्मिलित ना हो, यदि किसी को इस संस्था के बारे में संतुष्टी करना चाहते है तो वह सोसाइटी रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर संपर्क कर सकते है। पत्रकार वार्ता के दौरान पवन मिश्रा, कुमार दबे (राघव), प्रद्युम्न जी अग्रवाल, शैलेंद्र वर्मा, दयाशंकर सेठ, ईश्वर चंद्र वर्मा, हरविंदर सिंह राजपूत, मयाशंकर सेठ, टनमन,पीयूष गुप्ता, अरूण सोनी, पंकज सर्राफ, राजेश सेठ केराकत, कमलेश चंद्र वर्मा, संजय अग्रवाल (बाबू), सोनू सेठ, अनिल चंचल, महेश सेठ, उमेश उपाध्याय, किशोर सेठ, पृथ्वीपाल सिंह, जतिन रस्तोगी, गणेश कसेरा, गोपाल उपाध्याय, कमल कुमार सिंह, राजू वर्मा, जनार्दन वर्मा आदि मौजूद रहे।

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