नमाज के बाद खूब रो-रोकर दिल से दुआ करें और अपने रब से दुबारा हाजिरी, मगफिरत सेहत और अपने मुल्क के अमनो-अमान, सलामती व खुशहाली के लिए दुआ करें। फिर जम जम शरीफ किब्ला रूख करके तीन साँस में बिस्मिल्लाह करके पिये और बदन व चेहरे पर मले और खूब रो-रोकर अपने अपने लोगों और सारी उम्मते मुहम्मदिया के लिए तथा अपनी सेहत की दुआ करें। फिर मुल्लत्तजिम पर जाकर रो-रोकर दुआ करें। क्योंकि यहां दुआ कुबूल होती है। दुआ के बाद हजे असवद को बोसा या इस्तेलाम करें और उल्टे पांव रोते हुए और हसरत की निगाहों से खान-ए-काबा को देखते हुए मस्जिदे हरम से बाहर आ जाये। इस दौरान हाफिज सौदागर ने हज जायरीन को अरबी की गिनती और अरबी भाषा के कुछ रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले जुम्ले सिखाये। औरतों में लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून, समन खानम, निकहत फातमा जादि मौजूद थी। उन्होंने भी औरतों को तवाफे विदा का पूरा तरीका सिखाया।
इनकी रही खास मौजूदगी
खुसूती तौर पर वाराणसी से अली बख्श, रियाज अहमद, नसीर जमाल, मोहम्मद हनीफ, शनीम अहमद, बदरूदीन, शमशेर अंसारी, सफूद्दीन चंदौली से जावेद अली, मसी अहमद खान, नियामतउलाह खान, मंजूर आलम, मो. साजिद बलिया से मुनौवर हुसैन, इस्तियाज अहमद, गाजीपुर से लाल मोहम्मद, मोहम्मद आजम, रसीदुल अभीन, आफताब आलम, जौनपुर से सिददीक जफर, अब्दुल कलाम, अब्दुल वकार, सोनभद्र से मो० आरिफ खान तथा औरतों में, चांद अफसाना, सुलताना, जैतुननिशा, रूखसाना परवीन, खुश्बू बानो, मरियम बीबी, वरख्शा बेगम, निकहत खान सहित इसरा के सदस्यगण एवं पदाधिकारीगण मौजूद थे। लोगों का खैरमकदम आसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने किया तो शुक्रिया शाहरुख खान ने कहा। कैंप नबी पर सलाम भेजकर सम्पन्न हुआ।






