मिर्जापुर : मरम्मत के नाम पर हुए लाखों रुपए खर्च, लिकेज से हर मिनट सैकड़ों क्यूसेक बह रहा बांध का पानी, रोकवाने की मांग

तारा त्रिपाठी (मीरजापुर)। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्य से बनाया गया अहरौरा बांध के गरई सुलूस के गेट में हुए लिकेज से लगातार बह रहे पानी को न रोके जाने से किसान यूनियन ने कई दिनों तक अहरौरा बांध पर धरना चला। लाखों रुपए खर्च करके लिकेज की मरम्मत से सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने यह कह कर 22नवम्बर 2025 को धरना समाप्त कराया। बांध से पानी बहना बन्द हो गया है। उस समय बांध में पानी का लेवल 57.6फीट था। बांध के तेईसो फाटक तक पानी भरा था। इधर कई दिनों से मरम्मत किये गये गेट व एक अन्य मेन गेट कैनाल से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। बांध के उसी लिकेज से जहां मरम्मत कराई गई थी। हर मिनट सैकड़ों क्यूसेक पानी का बहना जारी है। पानी के बहने से अब तक बांध के सोलह फाटक तक का पानी बह चुका है। पानी का लेवल 57.6से घटकर 54.6फीट आ चुका है। कहना है कि जब अभी बांध का पानी खाली हो जायेगा तो गरमी के दिनों में क्या होगा। बांध तो बिल्कुल खाली हो जायेगा। पशुओं को पीने को भी पानी नहीं बचेगा। हर घर नल हर घर जल योजना भी खटाई में पड़ जायेगा। प्रस्तावित है कि 6 जनवरी को गेहूं की सिंचाई के लिए बांध के नहर खोले जायेगे। जब नहर खोली जायेगी तो बांध खाली होगा। अधिकारी यह कहकर पल्ला झार लेगें कि गेहूं की सिंचाई से बांध का पानी बहा है। ज्ञातव्य हो कि मानसून के समय जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने अपने बांध निरीक्षण के दौरान यह निर्देश दिया था। बांध के पानी का लेवल बरकरार रखा जाय। जब तक पानी ओवर फ्लो न हो बांध के फाटक न खोले जाय। अब जिलाधिकारी का आदेश निर्देश भी तार तार हो गया है। दूसरी तरफ नाम न छापने के शर्त पर किसानों ने यह बताया कि मछली मारने और बांध में खेती किसानी करने वाले किसानों के लिए बांध का पानी जान बूझकर बहाया जा रहा है। इसमें कुछ अधिकारियों की रूचि है। किसानों ने उक्त प्रकरण की जांच कर बेवजह बांध से बहाये जा रहे पानी को रोकवाने की शासन से मांग की है।




