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एजुकेशनवाराणसी

BHU:वनस्पति विज्ञान विभाग ने बैकयार्ड गार्डन,ग्लास हाउस सुविधा विकसित की

विभाग में गुणवत्तापरक शिक्षक एवं शोध को मिलेगा और प्रोत्साहन,संकाय प्रमुख, विज्ञान संकाय, प्रो0 एस0के0 उपाध्याय ने किया उद्घाटन


सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का वनस्पति विज्ञान विभाग शैक्षणिक उत्कृष्टता और वैज्ञानिक नवाचार का एक प्रतिष्ठित केंद्र है, जिसकी विरासत एक सदी से भी अधिक पुरानी है। वनस्पति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षण की शुरुआत 1919 में प्रोफेसर बीरबल साहनी, एफ.आर.एस. के दूरदर्शी नेतृत्व में हुई, जिन्होंने भारत में वनस्पति शिक्षा और अनुसंधान की एक समृद्ध परंपरा की नींव रखी। समय के साथ, इस विभाग का नेतृत्व प्रो. वाई. भारद्वाज, प्रो. आर. मिश्र और प्रो. आर. एन. सिंह जैसे प्रख्यात विद्वानों ने किया, जिन्होंने शैवालविज्ञान (Algology) और पारिस्थितिकी (Ecology) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शोध संस्थाएं स्थापित कीं। विभाग के प्रारंभिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 1927 में डॉ. बी. एन. सिंह को वनस्पति विज्ञान में डी.एससी. उपाधि प्रदान किया जाना था, जो इसकी अनुसंधान में दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।विभाग की सबसे मूल्यवान धरोहरों में से एक है राष्ट्रीय महत्व की हर्बेरियम (Index Herbariorum Code: BAN), जिसे हाल ही में पुनर्निर्मित किया गया है। इसमें हजारों संरक्षित पौधों के नमूने संकलित हैं, जिनमें कई दुर्लभ और ऐतिहासिक संग्रह शामिल हैं जो पिछले सौ वर्षों से अधिक की अवधि में एकत्र किए गए हैं। यह हर्बेरियम देश-विदेश के शोधकर्ताओं, विद्यालय समूहों और विद्वानों द्वारा नियमित रूप से देखा और सराहा जाता है तथा अंतरविषयक शोध का एक महत्वपूर्ण संसाधन है।

वर्तमान में इसे डिजिटाइज किया जा रहा है ताकि यह एक वैश्विक स्तर पर सुलभ डिजिटल संरचना के रूप में विकसित हो सके — जिससे अंतरराष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान और संरक्षण में भारत की भूमिका और अधिक सशक्त हो।स्थिरता, अनुभवात्मक शिक्षण और समुदाय सहभागिता को बढ़ावा देने की अपनी दृष्टि के अनुरूप, विभाग ने हाल ही में 23 जून, 2025 को प्रो. एस. के. उपाध्याय, डीन, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के कर-कमलों द्वारा बैकयार्ड गार्डन एवं ग्लास हाउस सुविधा का उद्घाटन किया। यह नव विकसित स्थल एक शोध केंद्र और जीवित कक्षा के रूप में कार्य करता है, जो वनस्पति शिक्षा और संरक्षण प्रयासों को समृद्ध करता है। इसके अंतर्गत एक क्रिप्टोगैमिक गैलरी की भी स्थापना की जा रही है, जिसमें शैवाल, कवक, ब्रायोफाइट्स और टेरिडोफाइट्स जैसे अपुष्पीय पौधों के अध्ययन और प्रदर्शन की व्यवस्था होगी। ये सभी पहल विभाग की उस निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जो पौध विज्ञान को आगे बढ़ाने, भारत की वनस्पति विरासत के संरक्षण और शैक्षणिक उत्कृष्टता को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए समर्पित है।

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