नहीं मैं चाहती कि मैं बाग का फूल बन जाऊं,मैं श्रोताओं के चरणों की बस….

सरस कवि सम्मेलन में श्रोताओं ने भरपूर लिया आनंद
गाजीपुर। जंगीपुर स्थित मां रामरति मैरिज हॉल में साहित्य चेतना समाज एवं मित्र मण्डली परिवार के संयुक्त तत्वावधान में एक सरस कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुगलसराय के विधायक मा.रमेश जायसवाल रहे तो विशिष्ट अतिथि के रूप में साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रसाद साहू थे। कवि-सम्मेलन का प्रारंभ ऋतु दीक्षित की वाणी वन्दना से हुआ। इसके बाद ओज के कवि हेमन्त निर्भीक ने ‘तिरंगे में लिपट कर देख तेरा ये लाल आया है ,नालायक कहती थी जिसको वतन के काम आया हैं’ सुनाकर श्रोताओं की खूब प्रशंसा अर्जित की।हास्य कवि डाॅ.अशोक अज्ञान ने अभी हाल ही में घटित घटना का उल्लेख करते हुए ‘हो गया है इश्क तो मुझे भरम नहीं रहेगा,यहाँ मत करो ड्रामा घर में डरम नहीं रहेगा’ सुनाकर खूब तालियां बटोरी। ऋतु दीक्षित ने अपने गाँव और अपनी माटी के प्रति अपने लगाव को दर्शाती अपनी यह भावपूर्ण पंक्तियां ‘इहे त बाटे ए गो आपन थाती, याद आवऽ ता आपन गाँव आपन माटी’ सुनाकर श्रोताओं को रससिक्त कर दिया।
हास्य-व्यंग्य के चर्चित कवि व मंच संचालक नागेश शांडिल्य ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचनाओं से श्रोताओं को हँसाकर लोट-पोट कर दिया– ‘हमारा एक वक्त का खाना रोज बचता है,क्योंकि दोपहर का खाना स्कूल में ही पकता है’ सुनाकर श्रोताओं को खूब आनन्दित किया। राज लक्ष्मी ने ‘नहीं मैं चाहती कि मैं बाग का फूल बन जाऊं,मैं श्रोताओं के चरणों की बस धूल बन जाऊं’ सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर साहित्य चेतना समाज के अध्यक्ष डाॅ.रविनन्दन वर्मा,उपाध्यक्ष संजीव गुप्त,सचिव हीरा राम गुप्त,संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी,इंजी.मनीष गुप्त,गंगा विशुन यादव,रामजी वर्मा,बृजेश वर्मा,लालजी गुप्ता,राजेश गुप्ता,नीरज वर्मा,डा.डी.के.वर्मा,बेचन वर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।कार्यक्रम के अन्त में साहित्य चेतना समाज के जंगीपुर इकाई के प्रभारी विद्युत प्रकाश ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।




