देश के सभी मंदिरों से ऊंची होगी राम मंदिर की धर्म ध्वजा

श्री सीताराम के विवाह की वर्षगांठ पर होगा ध्वजारोहण
अगहन मास शुक्ल पक्ष की पंचमी, जिस दिन भगवान राम का विवाह हुआ था, उसी दिन विवाह पंचमी को अयोध्या में राम मंदिर पर धर्म ध्वजा का आरोहण किया जाएगा। इस वर्ष यह दिन 25 नवंबर को है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर पर फहराई जाने वाली यह धर्म ध्वजा देश के सभी मंदिरों से ऊंची होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत की उपस्थिति में यह धर्म ध्वजा 196 फीट ऊंचाई पर फहराई जाएगी। 161 फीट ऊंचे मंदिर के मुख्य शिखर पर 35 फीट लंबा धर्म दंड स्थापित किया गया है। इसी धर्म दंड पर धर्म ध्वज का आरोहण होगा।राम मंदिर के मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धर्म ध्वजा फहराएंगे जबकि परिसर में बने भगवान शंकर, गणेश, अन्नपूर्णा व हनुमान जी आदि के शिखरों पर विशिष्ट अतिथियों द्वारा ध्वजा का आरोहण कराया जाएगा। धर्म ध्वज का रंग केसरिया होगा, जो 15 नवंबर तक बनकर परिसर में पहुंच जाएगा। ध्वजारोहण समारोह के लिए आठ हजार लोगों के आने की संभावना है, जिसमें करीब एक हजार राज्य अतिथि होंगे। इनमें केद्र व राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ विभिन्न राज्यों के राज्यपाल और अन्य विशिष्ट जन शामिल है। इनके लिए एक दिन पहले 24 नवंबर से रहने की व्यवस्था की गई है। चूंकि ध्वजारोहण समारोह विवाह पंचमी के दिन है इसलिए इस समारोह में शामिल होने के लिए श्रीराम के ससुराल जनकपुर से भी अतिथियों को बुलाया गया है। राम मंदिर में पहली बार राम विवाहोत्सव का भी आयोजन होगा।

मुख्य संपादक
ध्वजारोहण से जुड़ी धार्मिक क्रियाएँ 23 नवम्बर से शुरू हो जाएंगी। 25 नवंबर को ध्वजारोहण समारोह का समय लगभग सुबह 11:45 बजे से 12:15 बजे के बीच रखा जा रहा है। अतिथियों की सूची “समरस समाज” थीम पर तैयार की जा रही है, जिसमें आसपास के 24 जिलों के ग्राम प्रधानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि को शामिल किया जाएगा।आयोजन के दौरान आने वालों के लिए होटल, तंबू नगरी, धर्मशालाएँ) व्यवस्थित की जा रही हैं। सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और व्यवस्थापन के लिए विभिन्न समितियाँ गठित की जा रही हैं। तीर्थ क्षेत्र पुरम, कारसेवक पुरम, रामसेवक पुरम समेत अन्य स्थानों पर मेहमानों के रुकने के इंतजाम किए जा रहे हैं।इसके अलावा मठ-मंदिर एवं आश्रमों में भी मेहमानों को रोका जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, मंदिर निर्माण के प्रभारी गोपाल राव, विहिप के केंद्रीय पदाधिकारी विनायक राव देशपांडेय, कोटेश्वर शर्मा, भोलेंद्र, कारसेवक पुरम प्रभारी शिवदास, सहित विहिप के अन्य प्रांतीय पदाधिकारी पूरी व्यवस्था को देख रहे है।
ध्वजारोहण समारोह एक अत्यंत धार्मिक औरसांस्कृतिक महत्व का आयोजन है।
यह मुख्य रूप से भगवान श्रीराम के प्रति आस्था, मंदिर परिसर की पवित्रता और उत्सव के वातावरण को व्यक्त करने हेतु किया गया है। मंगलाचारण और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण समारोह आयोजित होगा। समारोह की शुरुआत आचार्यों द्वारा वेद-मंत्र, रामायण चौपाइयाँ और स्तोत्रों के उच्चारण से होगा। वातावरण में शंख और घण्टियों की ध्वनि से दिव्यता आएगी। ध्वजारोहण से पहले ध्वज का विधिपूर्वक पूजन किया जाएगा। इसमें नारियल, पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन और दीप-धूप से आरती की जाएगी। ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि ध्वज फहराते समय “जय श्रीराम” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठें। ध्वजारोहण के बाद मंगल गीत, भजन-कीर्तन होगे। रामलीला के दृश्य, नृत्य-नाट्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का प्रदर्शन किया जाएगा। ध्वजारोहण समारोह केवल ध्वज फहराने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह धार्मिक आस्था, भक्ति, संस्कृति और उत्सव का संगम होता है।
विवाह पंचमी हिन्दू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। यह वही पावन दिन है, जब भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह जनकपुर (नेपाल) में संपन्न हुआ था। इसलिए इसे सीता-राम विवाहोत्सव या विवाह पंचमी महोत्सव भी कहते हैं। इस वर्ष विवाह पंचमी 25 नवंबर को है।
इस दिन अयोध्या के राम और मिथिला की सीता का दिव्य मिलन हुआ था। यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि मर्यादा और भक्ति का संगम माना जाता है। कई जगहों पर विवाह की झाँकी और राम-सीता के स्वरूपों का प्रतीकात्मक विवाह आयोजित होता है। नेपाल के जनकपुर धाम में यह पर्व बहुत भव्य रूप से मनाया जाता है। वहाँ राम-सीता विवाह की झलकियाँ, शोभायात्राएँ, रथयात्राएँ और भजन-कीर्तन होते हैं। 25 नवंबर 2025 (मंगलवार) यह दिन राम-सीता विवाह की वर्षगांठ के रूप में भक्तिभाव से मनाया जाएगा। विवाह पंचमी भगवान राम और माता सीता के दिव्य विवाह की स्मृति है। यह भक्तों को आदर्श दांपत्य जीवन, समर्पण और मर्यादा की शिक्षा देता है। अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस दिन ध्वजारोहण समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है। अयोध्या के ज्यादातर मंदिरों के संत महंत वर पक्ष यानी श्री राम की तरफ होते हैं जबकि राम मंदिर से सटे गोकुल भवन के साधु संत कन्या पक्ष यानी सीता जी की तरफ से रहते है। इस दिन गोकुल भवन में बनने वाला दही बड़ा राम भक्तों को बहुत प्रिय होता है। धर्म ध्वजारोहण के अवसर पर इस बार की विवाह पंचमी पर गोकुल भवन में दही बड़ा के साथ विशेष प्रसाद बनाया जा रहा है। अयोध्या के सभी मंदिर इस दिन को भव्यता से मनाने की तैयारी कर रहे है।




