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गाजीपुर

गाजीपुर: एक सर्वश्रेष्ठ नवगीतकार थे डॉ उमाशंकर तिवारी : डॉ श्रीकांत पांडे

पुण्यतिथि पर काव्य और विचार गोष्ठी का हुआ आयोजन

गाज़ीपुर । नगर के हरिशंकर मुहल्ला स्थित डॉ उमाशंकर तिवारी के ‘गीतिका निवास’ पर उनकी पुण्यतिथि मनाई गई । कवि,समीक्षक डॉ संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि डॉ उमाशंकर तिवारी का जन्म जिले के बहादुरगंज गांव में सन् 1940 में हुआ और वह एक प्रसिद्ध नवगीतकार थे ।उनके चार नवगीत संग्रह प्रकाशित है। जो जलते शहर में, धूप कड़ी है ,तोहफे कांच घर के और असहमत समय आदि हैं। इस अवसर पर मुख्य वक्तव्य देते पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र के प्रो  श्रीकांत पांडे ने कहा की डॉ उमाशंकर तिवारी एक खूबसूरत इंसान ही नहीं एक सर्वश्रेष्ठ नवगीतकार थे। पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि डॉ उमाशंकर तिवारी सहज,सरल और श्रेष्ठ गीतकार थे। इस अवसर पर  काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध प्रबंधकार कामेश्वर द्विवेदी ने शार्दूल विक्रीडित छंद में अपनी सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।अपनी कविता सुनाते कहा कि”मंगलादि ग्रहों पर आज जा रहे हैं लोग ,किंतु खेद है कि घर पड़ोसी का न जानते भीतर तो नफरत की है आग जल रही,पर होठों पर कृत्रिम हास हैं संभालते। हरिशंकर पांडे ने अपनी कविता पिता सुनते सबको सोचने पर मजबूर किया हाय कैसी जमाने की रफ्तार है,आंकता भांपता मापता है पिता। नवगीतकार डॉ अक्षय पांडेय ने डां स्व उमाशंकर तिवारी पर अपनी कविता सुना लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया, कहा कि “जब कभी हरिशंकरी से मैं गुजरता हूं, उमाशंकर तिवारी जी मुझे हंसकर बुलाते हैं। गजलकार नागेश मिश्रा ने अपनी ग़ज़ल सु मधुर आवाज में प्रस्तुत की,अंधेरी रातों का बादल हुआ हूं।

डॉ उमाशंकर तिवारी की पुण्यतिथि पर काव्य पाठ करते कवि

है मेरा चांद कहां पागल हुआ हूं। व्यंग्य के हड़प्पा कहे जाने वाले हंटर गाजीपुर ने सुनाया कि”सोच में डूबे जो रहते थे तिवारी साहब ,उड़ते शब्दों को पकडते थे तिवारी साहब, खूब नवगीत लिखते थे तिवारी साहब, झूम कर मंच पर पढ़ते थे तिवारी साहब। डीएवी इंटर कॉलेज के पूर्व हिन्दी के अध्यापक प्रेम कुमार श्रीवास्तव ने हमने झेले हैं दर्द इतना की दर्द हो गया हूं।स्वास तक बिक चुकी है और मैं कर्ज हो गया हूं।अनन्य अक्षत (कार्तिक) ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा”यहां फूलों से ज्यादा खुशबू शब्दों की आ रही है।डॉक्टर उमाशंकर तिवारी की यादें झिलमिला रही है। गोपाल गौरव ने अपनी गजल सुना कर लोगों को आंदोलित किया “देख कर रास्ता बदल देते थे तुम। आज इतना प्यार आखिर किस लिए।। नवोदित व्यंगकार आशुतोष श्रीवास्तव ने सामाजिक परंपरा पर व्यंग्य किया। विजय कुमार ने अपनी कविता पढ़ते कहा “कैसे कह दूं कि आप साथ नहीं है ,मेरे सिर पर हाथ नहीं है।। डॉ संतोष कुमार तिवारी ने अपनी कविता नौकर का पाठ किया।कार्यक्रम का संचालन नवगीतकार  डॉ अक्षय पांडेय ने और अध्यक्षता डॉक्टर अशोक सिंह ने की। इस अवसर पर पीजी कॉलेज के सैन्य विभाग के प्रो डॉक्टर बद्री सिंह, डीएवी के अध्यापक श्री जितेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।

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