
सुशील कुमार मिश्र/ वाराणसी।पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद की ओर से चल रहे श्रीराम कथा के छठवे दिन जगद्गुरु बालकदेवाचार्य जी महाराज ने बाली के वध का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि अन्याय और अपराध के आधार पर अर्जित की गई शक्ति समाज के लिए अहितकारी होती है । खासकर तब जब ऐसे लोग राजसत्ता में भागीदार बन जाते है । जब शक्तिशाली बाली राजा बना तब पहले अपने भाई की पत्नी छीन लिया और उसको बेदखल कर दिया । भगवान अत्यंत दयालु और कृपा करने वाले है लेकिन दुष्टो और अत्याचारियों के प्रति अत्यंत कठोर है । बाली बहुत शक्ति शाली था , राम चाहते तो उसका उपयोग रावण के विरुद्ध कर सकते थे लेकिन नही भगवान ने उसको समाज के लिए अहितकारी माना । भगवान राम ने स्पष्ट कर दिया कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन मे चाहे जितना ताकतवर हो , कितना भी उपयोगी हो ,लेकिन यदि वह समाज और देश के लिए उपयोगी नही है तो उसका वध ही एकमात्र उपाय है । आज सत्ता बचाने के लिए बाहुबलियों का सिर्फ सहारा नही लिया जाता बल्कि उनको राज्य में बड़े पद दिये जा रहे है ,जिससे समाज और मानवता पीड़ित है । रामराज्य के लिए जरूरी है ऐसे बालियो का वध जो समाज और देश को नुकसान पहुचा रहे है । भगवान राम ने सुग्रीव को राज्य सौपकर यह भी संदेश दिया कि भारत की महान संस्कृति किसी पर हमला कर उसके राज्य को हड़पने की नही रही है । साम्राज्यवादी नीति पर भारत कभी नही चला ।




