भदोही : वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता और भारी भरकम टैरिफ ने कालीन उद्योग को किया प्रभावित

जर्मनी के फ्रैंफर्ट में लगे कालीन मेले से निर्यातको को अपेक्षा के अनुरूप नही मिला लाभ: एजाज अंसारी
मेले में बहोत कम पहुंचे अमेरिकन कस्टमर जिससे मेला रहा बहोत स्लो
आफ़ताब अंसारी
भदोही। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कालीन मेले का आगाज 13 जनवरी से हुआ जो आज 16 जनवरी को मेले का आखिरी दिन रहा। इस बीच भारतीय कालीन निर्माताओं ने नए-नए डिजाइन व कलर कम्बीनेशन के कालीन सैम्पल लेकर विदेशी आयातकों को आकर्षित करने के लिए पहुंचे थे। वहीं निर्यातक एजाज अंसारी ने कहा कि कालीन मेला उधोग के लिए संजीवनी होती है। लेकिन वहीं उन्होंने यह भी कहा कि उधोग पर छाई मंदी यूक्रेन और रसिया युद्ध जो पहले से ही उद्योग को प्रभावित कर रहा है उसपर अमेरिकन टैरिफ ने उद्योग की कमर झुका दी है। कहा स्कैंडिनेवियन देश के मार्केट जो कि स्वीडन, डेनमार्क, नार्वे, फिनलैंड खासतौर से युद्ध के कारण उधोग को प्रभावित किया है।
श्री अंसारी ने कहा आज पूरी दुनिया अपने इतिहास का सबसे बड़ा महंगाई का सामना कर रहा है। कहा विश्व की राजनीतिक अस्थिरता भी उधोग को प्रभावित किया है। विदेशो में बिजली, होटल, टैक्सी, खाने पीने का सामान, ट्रांसपोर्टेशन आदि 2 से 3 गुना बढ़ गया है जिसका असर उधोग पर सीधा पड़ा है। कहा लोग पहले अपने ज़रूरियात की चीजों को पूरा करेंगे बाद में लग्जरी आइटम खरीदेंगे। श्री अंसारी ने कहा आज वैश्विक मंदी के दौर से कालीन उधोग गुजर रहा है इसका मुख्य कारण राजनैतिक अस्थिरता ही है।
कहा निर्यातकों का प्रयास और हिम्मत फिर भी जारी है। विदेशी आयातकों को लुभाने के लिए मखमली कालीनों के नए-नए सैम्पल वाले कालीन मेले में प्रदर्शित किया गया। कहा अब तो समझ मे भी नही आता कि आयातकों को क्या पसंद आएगा। श्री अंसारी ने कहा मेला बहोत स्लो रहा जिससे ज्यादातर निर्यातको के चेहरे पर मायूसी छाई रही। कहा पहले और दूसरे दिन तो मेला ठीक-ठाक ही रहा लेकिन आखिरी दिन बहोत स्लो रहा और भारतीय पवेलियन में सन्नाटा पसरा रहा।




