सोनभद्र: म्योरपुर, बभनी व दुद्धी के 94 गांवों के ग्रामीण सेवन कर रहे फ्लोराइड युक्त पानी

राकेश चंदेल
हिन्दुस्तान संदेश/ म्योरपुर, सोनभद्र । जिले के दक्षिणांचल के फ्लोराइड प्रभावित पांच ब्लाक क्षेत्रों में केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्रीय भू जल बोर्ड और एनआईटी प्रयागराज की संयुक्त टीम के अभी तक के जांच और अध्ययन में म्योरपुर, बभनी तथा दुद्धी में 94 गांव फ्लोराइड प्रभावित पाए गए हैं। जबकि चोपन और कोन ब्लॉक क्षेत्रों में अध्ययन जारी है। अध्ययन टीम से जुड़े एमएनएनआईटी के प्रो एचके पाण्डेय की माने तो 94 गांव अति प्रभावित पाए गए हैं। जबकि अन्य दोनों ब्लॉक में अध्ययन जारी है। बताया कि टीम केवल जांच और अध्ययन ही नहीं इससे बचने और पानी को मौसम के अनुसार पानी में मिलने वाले फ्लोराइड का गहनता से अध्ययन कर रही है। उन्होंने बताया कि फ्लोराइड के दो मुख्य स्रोत मिले हैं, एक तो कोयले की राख में भी फ्लोराइड है। साथ ही यहां की गहरी चट्टानों में भी इसकी मात्रा पाई गई है। चट्टानों में मौजूद फ्लोराइड मौसम के हिसाब से भी जल स्रोतों में मिलती है। इसका भी अध्ययन किया जा रहा है। टीम इस समस्या का समाधान भी केंद्र सरकार को भेजेंगी। इसके बाद समस्या के समाधान केंद्र सरकार तय करेंगी। उन्होंने बताया कि फ्लोराइड युक्त पानी से जिले के दक्षिणी क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है। लोग दिव्यांग हो रहे है।उनका जीवन प्रभावित हो रहा है।
दक्षिणांचल में हर घर नल से पानी देना संभव नहीं
केंदीय भू जल और एमएनएनआईटी की संयुक्त टीम का मानना है कि हर घर नल जल योजना का पानी सभी जगह देना संभव नहीं है। ऐसे में फ्लोराइड युक्त पानी के उपचार की जरूरत है। टीम का दावा है कि दक्षिणांचल की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि सबको पानी देना संभव नहीं है। बताया कि हम अध्ययन के बाद उसका उपचार भी करने की तथ्यात्मक और गुणवत्तापूर्ण जानकारी देंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर फ्लोराइड को लेकर अध्ययन कर रही संयुक्त टीम का कहना है कि सोनभद्र वासियों के लिए श्राप बन चुका फ्लोराइड से निजात को लेकर जिला प्रशासन का समुचित सहयोग नहीं मिल रहा है। प्रो एचके पांडेय ने बताया कि हमारी टीम दो बार जिले के उच्च अधिकारियों से मिली लेकिन जिला प्रशासन का तर्क है कि हर घर जल नल योजना का पानी ही फ्लोराइड का समाधान है। अध्ययन से कुछ नहीं होगा। जबकि ऐसा पूरी तरह संभव ही नहीं है।




