
राकेश चंदेल
हिन्दुस्तान संदेश/ सोनभद्र। शनिवार को चोपन नगर में जनजातीय गौरव दिवस के नाम पर विशेष पार्टी कार्यकर्ता सम्मेलन कर गए सूबे के मुख्यमंत्री । यह बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहीं गई। भाकपा ने अपने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि चोपन नगर के कार्यक्रम स्थल के नजदीकी स्थानों पर पूर्व से पटरी पर लगाने वाले ठेले खोमचे और आस पास के गांवों से सैकड़ों सब्जी बेचने वालों की दो दिन रोजी-रोटी बंद कराया गया था, इसके साथ ही जिला प्रशासन द्वारा अपनी कारगुजारियों और भारी प्रदुषण को छिपाने के लिए दो दिन पहले से ही खनन व परिवहन पर भी रोक लगाया गया , जिससे प्रतिदिन होने वाले राजस्व की भी भारी क्षति हुई है । पार्टी के जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा को सच्ची श्रद्धांजलि तब है जब जिस समुदाय से बिरसा मुंडा की पहचान है , उस समुदाय के लोगों को रोजी-रोटी और सम्मान के साथ जीवन यापन की व्यवस्था सुनिश्चित हो , जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । कहा कि चोपन परिक्षेत्र के जनजातीय समाज के लोग खनन में रोजगार पर आश्रित है। भाजपा सरकार द्वारा खनन क्षेत्र में खुलेआम मशीनों का इस्तेमाल करवाया जा रहा है।
इस सरकार द्वारा हजारों जनजातीय समाज के मजदूरों को ही बेरोजगार कर दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया है। जहां जनजातीय गौरव दिवस को सफल बनाने के लिए हफ्तों से तैयारी में सरकारी मशीनरी जूटी हुई थी, वहीं मुख्यमंत्री के आगमन का यह कार्यक्रम जटिल समस्याओं से जूझ रहे सोनभद्र के लिए ऊंट के मुंह में जीरा जैसा साबित हुआ। महज कुछ नई पुरानी छोटी छोटी योजनाएं की घोषणाएं और शिलान्यास कर पार्टी कार्यकर्ताओं से ताली बजवाकर मुख्यमंत्री लखनऊ चले गए । जबकि सोनभद्र की जटिल समस्याओं के निराकरण को लेकर यहां की आवाम को मुख्यमंत्री के दौरें से काफी उम्मीदें थीं, वह निराशाजनक साबित हुई।कहा कि सोनभद्र में अभी भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें , बिजली, पानी किसानों की समस्या और युवाओं को रोजगार आदि तमाम समस्याओं का अंबार है। यहां उच्च शिक्षा के लिए कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय और लोगों को बेहतर चिकित्सा के एम्स जैसे संस्थान के साथ सोनभद्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कम से कम संयुक्त जिला चिकित्सालय और जन जीवन के लिए प्रदुषण से मुक्ति और यहां के युवाओं को रोजगार व यहां की कंपनियों के सीएसआर फंड को स्थानीय विकास में लगाने की विशेष जरुरत है। जनजातीय गौरव दिवस का कार्यक्रम महज़ दिखावा रहा। आदिवासियों व जनजातियों द्वारा पूर्व में जिस जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा के लिए पुस्तैनी अधिकार से पहचान रही है, वर्तमान में उसी जल, जंगल, जमीन को कार्पोरेट घरानों और खनन माफियाओं को लुटने की खुली छूट भाजपा सरकार ने ही दे रखी है। यह जनजातिय गौरव दिवस का कार्यक्रम सिर्फ भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन तक ही सीमित बन कर रह गया ।




