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बिहार कूच करेगी शंकराचार्य की गौभक्त सेना,चुनाव में गौरक्षा के लिए डलवाएँगे सनातनी हिंदुओं का वोट

शङ्कराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द जी का बिहार के हर जिले में होगा दौरा

संजय पांडेय
मुंबई।सनातन धर्म में गोहत्या महापाप है।गोहत्या करने वाले को समर्थन देने वाले को भी यह पाप लगता है। सत्ता में आकर गोहत्या करने वाले राजनीतिक दलों को मत देकर उन्हें सत्ता में लाने वाले मतदाताओं को भी गोहत्या का पाप लग रहा है।हिन्दुओं को इससे बचने और अपने मताधिकार का सही प्रयोग करने की आवश्यकता है।हमारे शास्त्र हमें बताते हैं कि गोमाता सर्व देवमयी है।इनकी पूजा करने से ३३ करोड देवी-देवताओं की पूजा एक साथ हो जाती है।इनका स्थान सर्वोपरि है। सनातन धर्म में देवता और गुरु के लिए नहीं,अपितु गोमाता के लिए पहली रोटी (गो-ग्रास) निकालने का नियम है।उक्त उद्गार ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती १००८ ने मुम्बई के बोरीवली कोराकेन्द्र में आयोजित गोसंसद् के प्रदेश प्रभारियों की बैठक में व्यक्त किए। कहा कि हमारे देश का यह भी गौरवपूर्ण इतिहास रहा है कि चक्रवर्ती सम्राट् दिलीप,भगवान् राम और भगवान् कृष्ण ने भी गोसेवा की है।परन्तु बहुसंख्यक गो-पूजक सनातनियों के इस देश में आज गोमाता की हत्या हो रही है,जो हम सबके लिए कलङ्क है।इसी कलङ्क को भारत की भूमि से मिटाने के लिए पूर्व में भी अनेक सन्तों ने गोरक्षा आन्दोलन किया था।तब से अब तक अनेक सरकारें आयीं,लेकिन किसी ने भी गोहत्या बन्दी की उद्घोषणा नहीं की,बल्कि गोहत्या को बढ़ावा ही देती रहीं।
उन्होंने आगे नारा दिया कि –
करे जो गोमाता पर चोट, हम कैसे दें उसको वोट
हमारा धर्म हमें यह भी सिखाता है कि यदि हम गलत करने वाले का समर्थन करते हैं,तो हमें भी उस गलत कार्य को करने का पाप भोगना पडता है। यदि कोई सरकार गोहत्या कर रही हो और हम उसे वोट देकर अपना समर्थन देते हैं तो उसके द्वारा किये जा रहे गोहत्या का पाप हमें भी लगेगा। देश में होने वाले चुनाव में कौन-सी पार्टी कब सत्ता में आयेगी, यह कभी भी पहले से नहीं कहा जा सकता।इसलिए आप सब यह स्पष्ट निर्णय कर लें कि जिस भी पार्टी की सरकार बने,उसे शपथ-ग्रहण करते ही सबसे पहला कार्य गोहत्या बन्द कराकर गाय को राष्ट्रमाता घोषित करना होगा। शङ्कराचार्य जी महाराज इस समय मुम्बई में चातुर्मास्य व्रत कर रहे हैं। भाद्रपद पूर्णिमा को सीमोल्लंघन के बाद वे मध्य प्रदेश के परमहंसी गंगा आश्रम में अपने ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव द्विपीठाधीश्वर स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के आराधना महोत्सव के लिए प्रस्थान करेंगे। वहाँ से वे सीधे बिहार के लिए रवाना होंगे।

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