देवरिया: सीजीएम कोर्ट ने दारोगा समेत तीन पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का दी आदेश

असगर अली
देवरिया।जनपद के बनकटा थाना क्षेत्र में पिछले दिनों पशु तस्कर के साथ हुए मुठभेड़ के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी की अदालत ने सख़्त आदेश जारी किया है। उन्होंने पुलिस द्वारा लगाए गए लूट और पुलिस कर्मियों पर फायरिंग करने के आरोप को नाकार दिया है। यही नहीं लापरवाही बरतने वाले दारोगा सुशांत पाठक, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार एवं कांस्टेबल सज्जन चौहान के विरुद्ध धारा 261 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया है। अदालत के सख्त आदेश के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। बनकटा थाने के उप निरीक्षक जयप्रकाश दुबे ने दिलीप सोनकर पुत्र छोटेलाल सोनकर निवासी परसिया करकटही थाना खुखुन्दू को गिरफ्तार कर लूट, चुराई गई संपत्ति रखने लोक सेवक पर हमला करने व हत्या करने के प्रयास सहित आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर सीजेएम न्यायालय में प्रस्तुत किया। पुलिस प्रपत्रों के अनुसार आरोपी दिलीप सोनकर को 12 नवंबर 2025 को पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत पकड़ कर थाने के हवालात में बंद किया था।पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा पेट दर्द की शिकायत करने पर उपनिरीक्षक सुशांत पाठक, पुलिसकर्मी राजेश कुमार व सज्जन चौहान उसे अस्पताल ले जा रहे थे। उसी दौरान वह शौच करने का बहाना बनाकर पुलिस की गाड़ी से नीचे उतरा और उपनिरीक्षक सुशांत पाठक की पिस्टल छीन कर भाग गया । सूचना पर अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचने पर जब झाड़ी नुमा बगीचे में तलाश किया गया तो अभियुक्त वही छिपा था और पुलिसकर्मियों को देखते ही पिस्टल से गोली चला दी। पुलिसकर्मियों ने भी दो राउंड फायर किया जिससे अभियुक्त के पैर में गोली लग गई। रिमांड पर सुनवाई के दौरान को सीजेएम ने पाया कि थानाध्यक्ष बनकटा गोरखनाथ सरोज को विधि का ज्ञान नहीं है। उन्होंने घटना को लूट की संज्ञा देते हुए आरोपी के पैर में गोली मारकर पिस्टल की बरामदगी दिखाई है। जारी आदेश में सीजेएम ने लिखा है कि स्पष्ट तौर पर पुलिस कर्मियों द्वारा अपने पदीय शक्तियों का दुरुपयोग किया गया है। ऐसे में आरोपी के विरुद्ध हत्या के प्रयास व लूट का कोई अपराध नहीं बनता है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी की अदालत ने उप निरीक्षक सुशांत पाठक पुलिसकर्मी राजेश कुमार व सज्जन चौहान के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया है। यही नहीं अदालत ने थानाध्यक्ष बनकटा गोरखनाथ सरोज व सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को प्रकरण में अभियुक्त की गिरफ्तारी तथा गलत प्रकार से गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के लिए भी प्रथम दृष्टया संलिप्त पाए जाने और पदीय शक्तियों का दुरुपयोग करने के लिए पुलिस अधीक्षक को निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया है।




