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भदोही

भदोही: अच्छी सोच से ही समाज का सृजन सम्भव: हाजी शाहिद हुसैन

बेटा व बेटी को दें एक समान उच्च व तकनीकि शिक्षा जिससे आने वाली नस्लें हो शिक्षित

ब्यूरो चीफ आफताब अंसारी की रिपोर्ट….

भदोही। शिक्षा एक अनमोल रत्न है जो कभी भी बेकार नही जाता। शिक्षा से ही समाज में रौशनी फैलाया जा सकता है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को शिक्षा जरुर दिलाएं। बगैर शिक्षा के व्यक्ति का जीवन व्यर्थ होता है। उक्त बातें भारतीय कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी शाहिद हुसैन अंसारी ने कही। उन्होने कहा कि पहले भी मुसलमानों में शिक्षा का स्तर ठीक नही था। लेकिन देश की आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद भी मुसलमानों के शिक्षा प्रतिशत में बढ़ोत्तरी नही आई। इसके पीछे खुद उनके अभिभावक जिम्मेदार है। हर जाति धर्म के लोगों में शिक्षा के प्रति जागरुकता आई। लेकिन मुसलमानों में जागरुकता नही आ सकी। उन्होने कहा कि देश की आजादी के पहले व उसके बाद सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की संख्या अच्छी खासी हुआ करती थी। लेकिन यह संख्या धीरे-धीरे घटती चली गई। जबकि पहले इतने विद्यालय कालेज व विश्वविद्यालय तथा संस्थान नही थे। अब तो काफी स्कूल व कालेज के साथ ही साथ शिक्षण संस्थान खुले है। वहीं काफी संख्या में मदरसों का भी संचालन हो रहा है। हाजी शाहिद हुसैन अंसारी शिक्षा के क्षेत्र में काफी सराहनीय कार्य कर रहे है। वे मदरसा अरबिया मदीनतुल इल्म पीरखांपुर के उपप्रबंधक है तो नूरखांपुर स्थित मदरसा तालिमुल जदीद के प्रबंधक है। श्री अंसारी बगैर स्वार्थ के समाज के हित और उत्थान के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी सपर्पित कर दी है। कहा अच्छी सोच से ही समाज को सजाया जा सकता है। लोगो को समाज के बेहतरी और गरीब बच्चो को तालीम दिलाने के लिए आगे आना चाहिए तभी जा कर समाज मे सुधार हो सकता है। श्री अंसारी भाकस के बैनर तले शिक्षा के प्रति लोगों में जागरुकता पैदा करते है। कहा मुसलमानों में पिछड़ा पन का कारण शिक्षा ही है। आज सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की संख्या शुन्य दशमल फीसदी हो गई है। कारोबार में भी उनकी संख्या नगण्य है। यह मेहनतकशी से अपने परिवार का जीवीकोपार्जन कर रहे है। मुसलमानों की बदतर होती हालत को देखते हुए उन्हे चाहिए कि वह अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दे। बेटा व बेटी में फर्क न समझे दोनो को ही उच्च व तकनीकि शिक्षा दे ताकि आने वाली नस्लें शिक्षित हो।

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