
वाराणसी। मौलिक चिंतन का भाषा अनुवाद तो हो सकता है पर भावानुवाद नहीं। आज के दौर में हमें डिजिटल प्लेटफॉर्म को हिंदी साहित्य के दृष्टि से समृद्ध करने की आवश्यकता है। हिंदी का अनुसरण अंग्रेजी को करना है ना की हिंदी को।हमारी राष्ट्रभाषा की सबसे बड़ी अड़चन अंग्रेजी है। हमें प्रयास करना होगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी को बढ़ाएं, यह जिम्मेदारी हिंदी भाषी लोगों की है।उपरोक्त उद्बोधन वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार ने उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन वाराणसी इकाई द्वारा हिंदी दिवस पर आयोजित विषय “डिजिटल युग में हिंदी का भविष्य” पर शिवपुर स्थित राघव राम वर्मा बालिका इंटर कॉलेज में रविवार को व्यक्त किया।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। स्वागत उद्बोधन वाराणसी उपज इकाई के अध्यक्ष विनोद बागी ने किया ।इस अवसर विशेष पर उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के विशेष आमंत्रित अतिथि प्रदेश महामंत्री आनंद कर्ण ने अपना उद्बोधन दिया। उपज वाराणसी इकाई द्वारा मुख्य अतिथि प्रदीप कुमार को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन डॉ अरविन्द कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती सुमन सिंह ने किया।इस अवसर पर राघव राम वर्मा बालिका इंटर कॉलेज की अध्यापिका श्रीमती अंजनी पाठक, छात्रा भूमि मिश्रा, नीलू यादव, उपज वाराणसी इकाई से महामंत्री मोनेश श्रीवास्तव, अनिल जायसवाल उपाध्यक्ष, महावीर प्रसाद श्रीवास्तव, प्रदीप उपाध्याय ,प्रज्ञा मिश्रा ने अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में संतोष कुमार, मनीष कुमार श्रीवास्तव ,संतोष कुमार प्रीत, कमलेश केसरी, राजेश कुमार श्रीवास्तव, अजय उपाध्याय, पुरुषोत्तम कुमार जालान ,गुलाब श्रीवास्तव उपस्थित रहे।




