वाराणसी: मस्तक रेखा देखकर करेंगे ज्योतिषीय गणना

शास्त्रार्थ महाविद्यालय में सप्त दिवसीय ज्योतिष कार्यशाला का हुआ समापन
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
हस्त रेखा एक जन्मपत्रिका समान है जिसे स्वयं ब्रह्मा ने बनाया है। इसमें प्रधान पाँच इन्द्रिय रेखाएं होती हैं। इसमें हृदय रेखा जिसे आयु रेखा भी कहते हैं दूसरा मस्तिष्क रेखा तीसरा पितृ रेखा,भाग्य रेखा एवं सूर्य रेखा इन पांच रेखाओं के द्वारा मनुष्य के जीवन में घटित होने वाली घटनाओं का विवरण प्राप्त किया जा सकता है। उक्त बातें गुरुवार को शास्त्रार्थ महाविद्यालय में चल रहे सप्त दिवसीय ज्योतिष कार्यशाला के समापन अवसर पर संचालक ज्योतिर्विद आचार्य संजय उपाध्याय ने कही।इन्होंने बताया कि भूत,भविष्य एवं वर्तमान का ज्ञान भी इन रेखाओं के द्वारा मनुष्य को प्राप्त हो सकता है। संयोजक संस्था के प्राचार्य डा. पवन कुमार शुक्ल ने बताया कि कुल 78 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में भाग लेकर प्रमाण पत्र प्राप्त किया। आगामी मई माह के 10 तारीख से एक माह का शिविर पुनः चलाया जाएगा जिसमें ललाट को देखकर ज्योतिष गणना करना सिखाया जाएगा। भाल रेखा के माध्यम से भविष्य व वर्तमान का भी फलादेश किया जा सकेगा। इस सभी प्राच्य पद्धतियों को सरल से सरल तकनीकी से बतलाया जाएगा जिससे आम जनमानस को भी इसका लाभ मिल सके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कृत पूर्व प्राचार्य डा. गणेश दत्त शास्त्री, डा.सारनाथ पाण्डेय,डा.विनोद राव पाठक आदि विद्वानों ने भी अपने विचार रखे।




