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उत्तर प्रदेशकुशीनगरस्वास्थ्य

बुद्धा हॉस्पिटल के खिलाफ जांच शुरू,संचालक मैनेज में जुटे

बुद्धा हास्पिटल द्वारा आयुष्मान कार्ड पर कृष्णा का फर्जी आपरेशन करने का मामला

पेट चीरने के बाद नही निकाली गयी थी पित्त की थैली और पथरी

हिन्दुस्तान संदेश
कुशीनगर। मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट मे शुमार आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड पर पथरी का फर्जी आपरेशन कर गरीब मजदूर की जिन्दगी को सासत मे डालने के मामले में बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर के खिलाफ जांच शुरू हो गयी है। यह जांच तत्कालीन डीएम के निर्देश पर सीएमओ द्वारा गठित टीम कर रही है। बताया जाता है कि बुधवार को डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में टीम बुद्धा हास्पिटल पहुंची और कृष्णा का आपरेशन करने वाले डॉक्टर व हास्पिटल के संचालक का बयान दर्ज किया। सूत्र बताते है कि बुद्धा हास्पिटल के संचालक नंदलाल कुशवाहा जांच को लीपापोती करने के लिए हर तरह के हथकंडा अपने में जुटे है। अब देखना दिलचस्प होगा कि योगी सरकार में पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के साथ खिलवाड़ कर धन का बंदरबांट करने वाले बुद्धा हास्पिटल व संचालक सहित चिकित्सक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
काबिलेगौर है कि जनपद के दुदही ब्लाक क्षेत्र के जिरात गांव के निवासी 48 वर्षीय कृष्णा पुत्र स्व. नरायण वर्मा ने पेट मे दर्द महसूस होने पर अल्ट्रासाउंड कराकर सरकारी हास्पिटल के चिकित्सक के सुझाव पर  बीते वर्ष जून माह के प्रथम सप्ताह में पडरौना नगर के पडरौना-कसया रोड पर स्थित बुद्धा हॉस्पिटल मे आयुष्मान भारत योजना के कार्ड पर ऑपरेशन करवाया था।  बुद्धा हास्पिटल मे कृष्णा का आपरेशन डाॅ.अंशुमान पाण्डेय ने किया ऐसा बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर के संचालक नंदलाल कुशवाहा का कहना है। यक्ष प्रश्न यह है कि आखिरकार डाॅ. अंशुमान पाण्डेय ने तकरीबन बीस इंच पेट चीरकर कृष्णा का आपरेशन किया तो फिर कृष्णा के पेट से पित्त की थैली व पथरी को क्यो नही निकाला? इसके पीछे चिकित्सक और हास्पिटल संचालक की मंशा क्या थी ? बताया जाता है कि आपरेशन के बाद बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर द्वारा 8 जून-2024 को कृष्णा को डिस्चार्ज किया गया था। कृष्णा की माने तो कुछ दिनो बाद फिर उसके पेट मे दर्द होने लगा जो ऑपरेशन के पूर्व हुआ करता था। फिर वह चिकित्सक के सुझाव पर दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया तो यह जानकर हक्का-बक्का रह गया कि उसके पेट में पित्त की थैली और पथरी जस के तस है।
नंदलाल ने गोरखपुर में दोबारा कृष्णा का कराया आपरेशन
बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर के कारगुजारियों को जब मीडिया ने उजागर किया तो बुद्धा हास्पिटल  हरकत मे आ गया हास्पिटल के संचालक नंदलाल कुशवाहा ने तत्काल पीडित कृष्णा के परिजनों से संपर्क किया। सूत्र बताते है कि नंदलाल कुशवाहा ने कृष्णा के परिजनों को मोटी रकम का लालच देकर आनन-फानन में कृष्णा का गोरखपुर में आपरेशन कराया जिसे बीते गुरुवार को हास्पिटल से डिस्चार्ज किया गया।
जानकार बोले अपराध छुपता नही
मीडिया द्वारा एक्सपोज करने के बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर के संचालक नंदलाल कुशवाहा भले ही कृष्णा का दोबारा आपरेशन कराकर अपनी कुटनीति पर इतरा रहे है लेकिन जानकारो का कहना है कि इससे बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर की कारगुजारी का किस्सा व अपराध नही खत्म नही होता है। सवाल अब भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि पहली बार कृष्णा का पेट चीरने के बावजूद पथरी और पित्त की थैली क्यो नही निकाली गयी।
कृष्णा के आयुष्मान कार्ड पर बुद्धा हास्पिटल ने कितना लिया भुगतान
स्वास्थ्य विभाग से जुडे लोगो का कहना है कि बुद्धा हास्पिटल द्वारा कृष्णा का तकरीबन बीस इंच पेट चीरने के बाद पित्त की थैली व पथरी न निकालने का उद्देश्य पीएम मोदी के आयुष्मान कार्ड पर बडा गोलमाल करना है। सूत्र बताते है कि कृष्णा के फर्जी आपरेशन मे बुद्धा हास्पिटल द्वारा बडा आपरेशन दिखाकर आयुष्मान कार्ड पर लाखो रुपये का भुगतान लिया गया है। हालाकि मीडिया इसकी पुष्टि नही कर रहा है लेकिन सूत्रो के दावे को नजर अंदाज करना भी उचित नही होगा। ऐसे मे यह जरूरी है कि जून – 2024 में कृष्णा के हुए आपरेशन में बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर के संचालक ने कृष्णा के आयुष्मान कार्ड पर कितना भुगतान लिया है। इसकी गहनता से जांच होनी चाहिये। अब देखना यह है कि जांच टीम इस बिन्दु क्या गुल खिलाती है। कहना ना होगा कि सीएमओ द्वारा गठित जांच टीम मे डिप्टी सीएमओ डॉ. राकेश गुप्ता, मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. बीरेंद्र कुमार, कसया सीएचसी पर तैनात एनेस्थिसिया डा. मुकेश कुमार शामिल है जो बुधवार को बुद्धा हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर पहुचकर कृष्णा वर्मा का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर सहित हास्पिटल के संचालक नंदलाल कुशवाहा का बयान दर्ज किया। सूत्रो का कहना है कि हास्पिटल संचालक नंदलाल ने कृष्णा व उसके परिजनों को मैनेज कर लिया है इस लिए वह अब कुछ बोलने को तैयार नही है लेकिन इससे किया गया अपराध खत्म नही हो जाता है।
रिपोर्ट – संजय चाणक्य

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