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धर्म

ईद के दूसरे दिन से रखतें हैं ‘6 नफिल रोज़ा’ फिर आती है छोटी ईद 

अज़ान की सदाओं पर रखा पहला रोजा

सरफराज अहमद

वाराणसी। पूरी दुनिया में छोटी ईद केवल बनारसी ही मनाते है। बनारस में ईदुल फित्र के दूसरे दिन से छह नफिल रोज़ा मोमिन रखते हैं। ईद के सातवें दिन फिर छोटी ईद की खुशियां मनाई जाती है। इस दौरान शहर के औरंगाबाद और मंडुवाडीह में छोटी ईद का मेला भी लगता है। आज लोगों ने ईद के दूसरे दिन नफिल रोज़ा रखा और शाम में अज़ान की सदाओं पर खजूर और पानी से रोज़ा खोला। इस दौरान इफ्तार की थाली लज़ीज़ पकवान से सजी हुई थीं। जिसका रोज़ादारो ने लुत्फ उठाया। जो लोग रोज़ा नहीं थे, वो अपने रिश्ते नातेदारों, अजीजों और दोस्तों से दूसरे दिन ईद मिलने पहुंचे। एक दूसरे से गले मिले और उन्हें मुबारकबाद दी।

छोटी ईद और हज़रत शाह तैय्यब बनारसी का उर्स

मंडुवाडीह स्थित कुतुबे बनारस हज़रत शाह तैयब बनारसी रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स ‘छोटी ईद’ के रूप में मनाया जाता है। उर्स के मौके पर आस्ताना परिसर में दिन भर मेला लगा रहता है। मेले में विभिन्न व्यंजनों का लोग जहां लुत्फ लेते हैं वहीं बच्चे खूब मस्ती करते हैं। छोटी ईद के मौके पर हजरत शाह तैयब बनारसी के आस्ताने पर हाजिरी देने के लिए देश के कोने-कोने से अकीदतमंदों की जुटान होती है। शाम होते ही आस्ताने पर पैर रखने की भी जगह नहीं बचती। बाबा की मजार पर गुलपोशी व चादरपोशी कर फातेहा पढ़ने वालों का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। इस दौरान फज्र की नमाज के बाद कुरआनख्वानी के साथ ही उर्स शुरू होता है। वहीं इशा की नमाज के बाद कुल शरीफ में अकीदतमंद शामिल होते हैं। इस मौके पर देश में अमन व खुशहाली के लिए दुआएं मांगी जाती है। वर्षो से चले आ रहे दस्तूर के मुताबिक छोटी ईद शानों-शौकत के साथ मनाई जाती है। मदरसा दारुल उलूम तैयबिया मोइनिया दरगाह शरीफ मंडुवाडह के प्रिंसिपल मोहम्मद अब्दुस्सलाम रशीदी ने बताया कि उर्स ईद के सातवें दिन मनाया जाता है। आयोजन को लेकर क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर दराज से आने वालों में काफी उत्साह रहता है। लोग एक-दूसरे को छोटी ईद कि मुबारकबाद देते हैं। हर कोई खुशी से लबरेज नजर आता है।

औरंगाबाद में भी लगता है मेला

छोटी ईद पर औरंगाबाद में भी मेला लगता है। इस मौके पर हज़रत हवा शाह वह हज़रत हिम्मत शाह का अकीदत के साथ उर्स मनाया जाता है। उर्स के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ता है। गुस्ल, फातिहा और चादर पोशी का दौर देर रात तक उर्स में चलता है। यहां भी छोटी ईद कि मुबारकबाद देने और खुशियां मनाने दूर दराज से लोग जुटते हैं।

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