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उत्तर प्रदेशएजुकेशनवाराणसी

बीएचयू के विज्ञान के विद्यार्थियों की क्षमता असाधारण:एडीजी पियूष मोडिंंया

अगर सफल होना है, तो मोबाइल के रील में ज्यादा समय नहीं देना है

सुशील कुमार मिश्र/ वाराणसी
बीएचयू का विज्ञान संस्थान न केवल अच्छे विद्यार्थी तैयार कर रहा है, अपितु यहाँ के पढ़े विद्यार्थी सिविल सर्विसेज में पहली रैंक भी लाते है। यहाँ के शिक्षकों को ऐसे विद्यार्थी तैयार करने की बहुत बधाई जो 1-2 बार की असफलता के बावजूद भी हिम्मत नहीं हारते और अपनी मंजिल प्राप्त करके ही चैन लेते है। यह बात यह बनारस के एडीजी आईपीएस पीयूष मोर्डिया ने कही। वह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विज्ञान संस्थान स्थित महामना सभागार में हिंदी प्रकाशन समिति (भौतिकी प्रकोष्ठ) के तत्वावधान में “संवाद” कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।श्री मोर्डीया ने विद्यार्थियों में भविष्य की करियर एवं परीक्षा के दिनों में होने वाली की समस्याओं से बचने के सात मूल्यवान मन्त्र बताये ।स्वयं को हमेशा ऊर्जावान बनाये रखना सफलता की पहली सीढ़ी है।स्वयं के समय को काटकर उस काटे समय का सदुपयोग करना सफलता की दूसरी सीढ़ी है।कोई भी परीक्षा कठिन नहीं अगर तैयारी सही हो। तैयारी में सफलता के मन्त्र हैं। अनुशासन।अगर सफल होना है तो मोबाइल के रील में ज्यादा वक्त नहीं देना है।सही तरीके से अक्षर से शब्द एवं शब्द से वाक्य बना लेने तक की यात्रा को सफलता पूर्वक पूरा करने वालों के लिये कुछ भी नामुमकिन नहीं।

आने वाला दिन हमेशा पिछले दिन से बेहतर बनाने का प्रयास करें।किसी भी प्रयास का परिणाम उसी क्षण नहीं बल्कि समयोपरांत मिलता है इसी कारण निरन्तर प्रयास का अभ्यास रखें।श्री मार्डिया ने कछुए एवं खरगोश की कहानी का नया संस्करण अपने अन्दाज में बताया। हिंदी प्रकाशन समिति के पत्रिका अचिंत्य का उन्होंने ऑनलाइन विमोचन भी किया। उनके व्यक्तित्व पर टिप्पणी करते हुवे शोध क्षात्र रौनक ने उनके द्वारा कैंसर ग्रस्त बालक को 1 दिन का एडीजी बनाने से लेकर उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को याद किया। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चन्द्रशेखर पति त्रिपाठी द्वारा दिया गया। मोर्डिया ने इसके पहले कार्यक्रम की शुरुवात में महामना के प्रतिमा पर मुख्य अतिथि द्वारा माल्यार्पण किया गया। कुलगीत देबश्रुति और साथियों ने प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि का औपचारिक सम्मान संकाय प्रमुख प्रो. सत्यांशु कुमार उपाध्याय (डीन) एवं हिंदी प्रकाशन समिति के समन्वयक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे द्वारा किया गया।कार्यक्रम में बीएचयू के डॉ सचिन कुमार तिवारी, डॉ बिनायक दुबे, डॉ अखिलेश चौबे, डॉ अरविन्द शुक्ल, डॉ अभिषेक द्विवेदी सहित शोध विद्यार्थी राणा प्रताप सिंह, चंचल, शैलेश, डॉ राहुल, गिरीश, नीरज तिवारी सहित विभिन्न संकाय एवं विभागों से आए शिक्षकगण और छात्रगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, छात्रों और शिक्षकों दोनों ने इस संवाद कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरक बताया।

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