
अजीत पांडेय / सोनभद्र । जिले में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं।बीते दिनों ही आकाशीय बिजली कहर बनकर गिरी, जिसमें दो बालिकाओं की मौत हो गई। पिछले साल भी आकाशीय बिजली गिरने से 29 लोगों की मौत हो गई थी। यहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी हैं कि सबसे अधिक बिजली गिरती है।इसके साथ ही अन्य मानवीय कारण भी माना जा रहा है, जिसमें कोयला जलने से निकलने वाले अवशोषित कण भी कारक हो सकते हैं।पहले से हुए शोध में भी यह बात सामने आ चुकी है कि यूपी में सबसे अधिक आकाशीय बिजली सोनभद्र में ही गिरती है। अवशोषित कण को लेकर अक्सर सेमिनार आदि में यह चर्चा होती रही है। हालांकि इसपर शोध की आवश्यकता है। ताकि इसकी रोकधाम के लिए कोई योजना बन सके। सोनभद्र ऊंची पहाड़ियों से घिरा है।पहाड़ियां बादलों के आवेश को आकर्षित करती हैं। मानसून के दौरान भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान, बिजली गिरने की घटनाओं को बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का कहना हैं कि ऊंची चोटियां और पहाड़ियां बिजली को जमीन पर आने के लिए एक आसान रास्ता (कंडक्टर) प्रदान करती हैं,जिससे वे सीधे पेड़ों या ऊंचे स्थानों से टकराती हैं।घने वन क्षेत्र भी बिजली को आकर्षित करते हैं। तूफानी बादलों में विपरीत आवेश (पाजिटिव और नेगेटिव) के कण आपस में टकराते हैं, जिससे लाखों वोल्ट की बिजली उत्पन्न होती है। यह चार्ज बादलों के बीच या बादलों और धरती के बीच बिजली का बड़ा वोल्टेज अंतर पैदा करता है, जो सीधे जमीन पर आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आकाशीय बिजली बादलों में धनात्मक और ऋणात्मक चार्ज के घर्षण से पैदा होती है,जो जमीन पर मौजूद ऊंची वस्तुओं (पेड़, खंभे, इंसान) के माध्यम से न्यूट्रल होने के लिए गिरती है।इससे बचने के लिए गरज के समय पक्के मकान में रहें, पेड़/धातुओं से दूर रहें,और बाहर होने पर दोनों पैर सिकोड़कर बैठ जाएं।वहीं मैदान,खेत, तालाब,नदी या स्विमिंग पूल में न रहें। इसके अलावा अकेले या ऊंचे पेड़ के नीचे कभी शरण न लें, क्योंकि पेड़ बिजली के लिए आसान टारगेट होते हैं। विशेषज्ञों की यह भी सलाह है कि छाता,लोहे की छड़,बाइक, या बाड़ से दूर रहें,क्योंकि धातु बिजली के अच्छे सुचालक हैं। बिजली के उपकरणों,तार वाले फोन और प्लग इन की गई चीजों का उपयोग न करें। यदि कहीं छिपने की जगह न हो, तो जमीन पर लेटें नहीं, बल्कि दोनों पैरों को सिकोड़कर, सिर को घुटनों के बीच रखकर, कानों को ढककर बैठ जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में जान-माल की क्षति को कम करने के लिए दामिनी ऐप तैयार किया गया है। इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने का अभियान चलाया जाता है, जो बिजली गिरने से आधे घंटे पहले सचेत कर सकता है। सुरक्षा के लिए, खुले मैदानों या अकेले पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचना चाहिए। दुद्धी क्षेत्र में ज्यादा बिजली गिरने वाले कुल 72 गांवों का सर्वे छह साल पहले ही किया किया गया था। इन गांवों में बिजली गिरने से जनहानि के अलावा पशुओं की भी मौत होती आई है। इसमें कुलडुमरी, डूमरडीहा ,दुद्धी, जाबर, मल्देवा, रजखड़, फुलवार, घिवही, विंढमगंज, केवाल, म्योरपुर, बभनी, करकछी, नधिरा, आरंगपानी, खोतोमहुआ, डेढा, अमवार, दिघुल, दुम्हान, हथवानी, हाथीनाला, बहेराडोल आदि गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में तड़ित चालक यंत्र लगाने की मांग अक्सर ही उठती रही है।




