
अजित पाण्डेय / वाराणसी। एमबीबीएस, एमएस,एमसीएच, एसजीपीजीआई लखनऊ थायराइड रोग विशेषज्ञ एवं ब्रेस्ट कैंसर सर्जन भोजूबीर यूपी कॉलेज के नजदीक स्थित डॉ ओपी प्रजापति ने एक खास बातचीत में बताया कि थाइराइड ग्रंथि हमारे गले के निचले हिस्से में तितली के आकार की होती है। यहाँ थाइराइड रोग से जुड़े होते है। थाइराइड दो प्रकार का होता है, और दोनों के लक्षण अलग-अलग होते हैं: हाइपो थायरायडिज्म वजन बढ़ना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, कब्ज, ठंड ज्यादा लगना, त्वचा का सूखापन और तनाव।हाइपर थायरायडिज्म अचानक वजन कम होना, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना ज्यादा आना और नींद न आना। क्या थाइराइड को जड़ से खत्म किया जा सकता है?अधिकांश मामलों में, थाइराइड एक लाइफस्टाइल और हार्मोनल विकार है जिसे दवा, सही खान-पान और योग द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, ऑटोइम्यून समस्याओं के कारण होने वाले थाइराइड में अक्सर लंबे समय तक दवा की आवश्यकता होती है। थाइराइड की जांच के लिए कौन सा टेस्ट जरूरी है।थाइराइड के स्तर को मापने के लिए टीएफटी थाइरॉएड फंक्शन टेस्ट कराया जाता है। इसमें मुख्य रूप से तीन चीजों की जांच होती है । थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन), टी3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन), और टी 4 थायरोक्सिन।थाइराइड में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।खान-पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है:- क्या खाएं: आयोडीन युक्त नमक, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, मछली और नट्स। क्या न खाएं: सोयाबीन और उससे बनी चीजें, पत्तागोभी, फूलगोभी, और ब्रोकली (खासकर कच्ची), और ज्यादा चीनी वाली चीजें।क्या थाइराइड गर्भावस्था को प्रभावित करता है।हाँ, थाइराइड का स्तर असामान्य होने पर गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है। गर्भावस्था के दौरान भी थाइराइड का स्तर सही रखना मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।



