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गाजीपुरगोष्ठी

हमारा शहर ये गाजीपुर, चमक से अब कोसों दूर ,ये गड्ढा बोल रहा है…..

ख्यातिलब्ध साहित्यकार, पत्रकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रीकृष्ण राय 'हृदयेश" के व्यक्तित्व व कृतित्व पर हुई चर्चा

गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज एवं श्रीकृष्ण राय हृदयेश शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के तहत विचार-गोष्ठी व कवि-गोष्ठी का आयोजन नगर के नखास स्थित शिक्षिका डाॅ ॠचा राय के आवास पर आयोजित की गई । शुभारंभ संजय पाण्डेय के सरस्वती वन्दना से हुआ। प्रथम चरण में आयोजित विचार-गोष्ठी में ख्यातिलब्ध साहित्यकार, पत्रकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रीकृष्ण राय हृदयेश के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा हुई। डाॅ.ऋचा राय ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी हृदयेश ने मिथकीय काव्य की रचना की। ‘भोजपुरी सतसई’ भोजपुरी भाषा की मानक कृति है।’सत्यासत्य’ महाभारत पर आधारित है। ‘नवदीप’ रामायण के पात्रों को लेकर आधुनिक परिप्रेक्ष्य में देखने का प्रयास है।’शंखपुष्पी’ में वेदकालीन व्यवस्था का चित्रण है।’लहर लहर लहराए गंगा’ खंडकाव्य में गंगा की दुर्दशा और मानव की स्वार्थी प्रवृत्ति का चित्रण है।’ संजीवनी’ खंडकाव्य में युवा नेतृत्व की बात कही गई है।साहित्य चेतना के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने कहा कि हृदयेश हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू समेत कई समाचार पत्रों के संवाददाता थे साथ ही ‘लोक सेवक’ साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया। इसके साहित्यिक विशेषांक इतने स्तरीय होते थे कि उसकी पाठकों को प्रतीक्षा रहती थी। गिरिजा राय ने कहा की पौराणिक पात्रों को लेकर आधुनिक संदर्भों और समस्याओं का चिंतन आज भी उनकी रचनाओं को प्रासंगिक बनाता है। द्वितीय चरण में हुई कवि-गोष्ठी में शिक्षक मनोज यादव बेफिक्र ने ‘झण्डा से झण्डा तक पढ़ाई होती थी/अनुशासन था और कड़ाई होती थी’ सुनाकर अपने विद्यार्थी जीवन का अनुभव साझा किया।युवा शायर गोपाल गौरव ने ‘खून का दीपक जलाएँ इस अंधेरी रात में हम/फिर कहीं जाकर सवेरा चम्पई हो पाएगा’ सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। युवा व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने ‘वो इंसान था या कागज का पुलिंदा/राशन कार्ड में मर गया, आधार में था जिंदा’ सुनाकर विसंगतियों को रेखांकित किया।वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी अमर ने अपनी व्यंग्य रचना ‘फिर लौटे यदि युग त्रेता/नहीं जन्मेंगे राम जन्मेंगे नेता’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।सुपरिचित शायर बादशाह राही ने ‘हमारा शहर ये गाजीपुर/चमक से है अब कोसों दूर/ये गड्ढा बोल रहा है’ सुनाकर गाजीपुर नगर की सड़कों के गड्ढों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।युवा कवयित्री प्राची राय ने ‘भ्रष्ट शासन,त्रस्त जनता,चापलूस अधिकारी/चुनाव के पहले नेता भिखारी’ सुनाकर अतीव प्रशंसा अर्जित की।वरिष्ठ कवि दिनेश चन्द्र शर्मा ने ‘आग नफरत की तुम तो जलाते रहे/हम तो इस आग को बुझाते रहे’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।डाॅ.ॠचा राय ने ‘चूड़ी खनकत हाथ कहाँ बा/देवर भौजाई क परिहास कहाँ बा’ सुनाकर श्रोताओं को आनन्दित किया।वरिष्ठ गीतकार व गजलकार नागेश मिश्र ने ‘कुछ दिल की,कुछ दुनिया के नजारे होते हैं/शेर सिर्फ अल्फाज नहीं इशारे होते हैं’ सुनाकर ढेर सारी वाहवाही लूटी।संजय पाण्डेय और अभिमन्यु यादव की सांगितिक प्रस्तुति का भी श्रोताओं ने भरपूर आनन्द लिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता नागेश मिश्र ने और संचालन साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी, हिमांशु राय, अदिति, कार्तिक, प्रबुद्ध,आयुषी, शुभम् आदि उपस्थित थे।धन्यवाद ज्ञापन गिरिजा राय ने किया।

   

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