Slide 1
Slide 1
कविताभोजपुरी

रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइंया : राम बहादुर राय

रहि-रहि   बड़ा  याद  आवे   लरिकइंया
बरखा  के  पानी  आ  कगजा के नइया!

नानी  कहे  कहनी  एगो राजा एगो रानी
राजा के महलिया भरल रहे सोना चानी
फुदुकि फुदुकि नाचे गावे सोन चिरइया।

रहि -रहि   बड़ा  याद  आवे  लरिकइंया
बरखा  के  पानी  आ कगजा के नइया!

गंवुआ  के पूरुब ओरि  हई गांगा मइया
पंवरी  जा  खूबे  संगे  लेके  डेंगी नइया
महल  बनाइंजा लेके उजरकी बलुइया।

रहि – रहि  बड़ा  याद  आवे लरिकइंया
बरखा  के  पानी आ कगजा के नइया!

गंवुआ के पछिम  रहे अमवा के बरिया
लाठी लेके होखत रहल खूबे अगोरिया
मारिंजा लुकाई के हो टीस के पुलुइयां।

रहि – रहि  बड़ा  याद  आवे लरिकइंया
बरखा के  पानी  आ कगजा के नइया!

झोरा-पटरी  लेके  स्कूलिया में जाइंजा
रहिया बीचे घरे  संहतिया के लुकाइंजा
छुट्टी के  बेरा घरे  लवट के आ जाइंजा
तहिया माहुर अस  लागत रहे पढ़इया।

रहि – रहि  बड़ा  याद  आवे लरिकइंया
बरखा के पानी  आ  कगजा के नइया!

होखे  आइस-पाइस, कबड्डी आ चीका
बिन ओल्हा-पाती  मन हो जाव फीका
एक  दोसरा बिना चलत रहे ना नइया।

रहि – रहि  बड़ा  याद आवे लरिकइंया
बरखा  के पानी आ कगजा के नइया!

गंवुआ के गोंयेड़ा  पाकड़ि  के गंछिया
दूध पी  के  दवुरत रहे  बछवा-बछिया
खुस होके  पगुरी  करे सोकनी गइया।

रहि – रहि  बड़ा  याद आवे लरिकइंया
बरखा  के पानी आ कगजा के नइया!

राजा के  राज  गइल  बीतल  समइया
कहे  राम  बहादुर  सजग रहऽ  भइया
जेकरा  संगे  बाड़ऽ  उहे हवुए मुदइया
दुसुमन से कइसे  तूं  बंचबऽ ए भइया।

रहि  रहि  बड़ा याद आवे  लरिकइंया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
               
भरौली, बलिया,उत्तर प्रदेश
#highlight
#भोजपुरी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button