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लखनऊ

लखनऊ : सपाक्स पार्टी ने रखा एक राष्ट्र–एक पहचान का एजेंडा

जातिगत प्रावधानों के खिलाफ तेज़ किया अभियान

शाश्वत तिवारी /लखनऊ । देश की राजनीति में वैकल्पिक विचारधारा के रूप में उभरी, सपाक्स पार्टी (सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समाज) ने अपने सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए “एक राष्ट्र–एक पहचान” की अवधारणा को केंद्र में रखा है। पार्टी का दावा है कि उसका मूल उद्देश्य जातिगत विभाजन को समाप्त कर सभी भारतीयों को समान अधिकार दिलाना है। 2016-2018 के बीच मध्य प्रदेश में गठित इस राजनीतिक दल ने एक बार फिर अपने वैचारिक एजेंडे को मुखर करते हुए कहा है कि वह उन सभी नीतियों और कानूनों का विरोध करती है, जो समाज को जाति और धर्म के आधार पर विभाजित करते हैं। सपाक्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (यूपी) इं.अरविंद कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि सपाक्स का दर्शन “पहले भारतीय नागरिक” की भावना पर आधारित है, जिसमें जाति और धर्म को राष्ट्रीय एकता से नीचे रखा गया है। सपाक्स पार्टी ने अपने सिद्धांतों में कहा है कि वह संविधान और कानूनों में मौजूद जातिगत प्रावधानों का विरोध करती है। पार्टी के अनुसार, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग आयोगों की जगह “गरीब वर्ग आयोग” और “मध्यम वर्ग आयोग” जैसे संस्थानों की स्थापना की जानी चाहिए, ताकि समाज में विभाजन की बजाय समावेशी विकास को बढ़ावा मिले। पार्टी ने विभिन्न जाति-आधारित छात्रावासों को समाप्त करने की मांग की है। उसका प्रस्ताव है कि सभी वर्गों के गरीब छात्रों के लिए एक समान “भारत छात्रावास” की व्यवस्था हो, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत हो। इसी क्रम में सपाक्स ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम ( एससी/एसटी एक्ट) जैसे कानूनों में बदलाव या समाप्ति की भी मांग की है, जिसे वह सामाजिक वैमनस्य का कारण मानती है। सपाक्स पार्टी आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था के विरोध में खड़ी है। पार्टी का कहना है कि यदि आरक्षण देना ही है, तो वह जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए। पार्टी सभी गरीब परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं निःशुल्क देने की वकालत करती है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। पार्टी ने प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने को अनिवार्य बनाने की मांग की है। इसके साथ ही “हम दो, हमारे दो” के सिद्धांत के तहत सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की भी बात कही है। सपाक्स ने किसानों के हित में कृषि उत्पादों के आयात पर रोक लगाने और भारतीय किसानों को उचित मूल्य दिलाने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं, चुनावी सुधारों के तहत पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सीट आरक्षण को समाप्त करने की मांग उठाई है, यह कहते हुए कि हर नागरिक को समान अवसर मिलना चाहिए।

2018 चुनाव और राजनीतिक प्रभाव

मध्य प्रदेश के 2018 विधानसभा चुनाव में सपाक्स ने सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया था। हालांकि पार्टी को बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन उसने पारंपरिक वोट बैंक समीकरणों को प्रभावित करने का प्रयास किया और राजनीतिक विमर्श में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सपाक्स पार्टी अपने सिद्धांतों को आदर्शवादी और राष्ट्रवादी” बताते हुए देशभर में इनके प्रचार-प्रसार की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर ही भारत एक मजबूत और समावेशी राष्ट्र बन सकता है। जय सपाक्स, घर-घर सपाक्स के नारे के साथ पार्टी अब अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के अभियान में जुटी है।

 

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