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डॉ निर्भीक साहित्य सम्मान 2025  से सम्मानित होंगे डॉ सुनील कुमार पाठक

भोजपुरी आलोचना साहित्य के विकास में रहा है विशेष योगदान

हिंदी भोजपुरी के साहित्यकारों में खुशी

पटना। डॉ.सुनील  कुमार  पाठक  को भोजपुरी साहित्य  जगत का प्रतिष्ठित  साहित्यिक  सम्मान-“डॉ.निर्भीक  साहित्य  सम्मान-2025″दिये जाने की घोषणा जमशेदपुर  भोजपुरी साहित्य  परिषद  द्वारा कल की गई  है। डाॅ.सुनील को यह सम्मान भोजपुरी आलोचना साहित्य के विकास में उनके विशेष योगदान  को देखते हुए  दिया गया है। हाल में प्रकाशित उनकी दो भोजपुरी पुस्तकें -‘पढ़त-लिखत ‘और ‘भोजपुरी कविता रुचि आ रचाव ‘काफी चर्चित हुई हैं।इन्हें भोजपुरी का प्रथम हाइकुकार भी माना जाता है।इनकी कृति ‘नेवान’ भोजपुरी की प्रथम हाइकु कविता संग्रह  है। हिन्दी और भोजपुरी के प्रतिष्ठित कवि-समीक्षक डाॅ.सुनील पाठक को ‘निर्भीक स्मृति साहित्य सम्मान  2025’ दिये जाने की घोषणा का अखिल भारतीय  भोजपुरी साहित्य  सम्मेलन  के अध्यक्ष डाॅ.ब्रजभूषण मिश्र, महासचिव प्रो.जयकांत सिंह

सहित वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यदेव पाठक पराग,डाॅ.अशोक  द्विवेदी,भगवती प्रसाद  द्विवेदी,डाॅ.बलभद्र, प्रो.पृथ्वीराज सिंह,प्रो.नीरज सिंह, प्रो.चंद्रेश्वर, जितेन्द्र कुमार, मनोज भावुक,डाॅ.जितेन्द्र वर्मा, ,उदय नारायण  सिंह, डाॅ.संतोष पटेल,डाॅ.संतोष कुमार,चतुर्वेदी,प्रो.प्रमोद कुमार तिवारी,डाॅ.सतीश कुमार  राय,डाॅ.तैयब हुसैन  पीड़ित, प्रो.हरेन्द्र हिमकर,कुमार विरल ,प्रेमशीला शुक्ल, कनक किशोर, डाॅ.विष्णुदेव तिवारी ,गंगा प्रसाद  अरुण, डाॅ.शहंशाह आलम,दिनेश पांडेय, डाॅ.प्रसेनजीत तिवारी,डाॅ.अजय कुमार  ओझा,डाॅ.अशोक प्रियंवद,डाॅ.हरेश्वर राय,डाॅ.हरेराम  पाठक, केशव मोहन पांडेय ,जे.पी. द्विवेदी,यशवंत  मिश्र, डाॅ.रंजन विकास, नवीन चंद्रकला कुमार, रामबहादुर  राय, दर्जनों हिन्दी-भोजपुरी साहित्यकारों ने स्वागत करते हुए  इस निर्णय  पर हार्दिक  प्रसन्नता व्यक्त  की है तथा डाॅ.सुनील कुमार पाठक को बधाई  दी है। यह सम्मान डाॅ.पाठक  को आगामी 21 मई को जमशेदपुर के तुलसी भवन में प्रदान किया जायेगा।
                     

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