International News भारत ने यूएन के मंच पर कृषि क्षेत्र के अपने इनोवेटिव अनुभवों को साझा किया

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित 11वें एसटीआई फोरम के दौरान यूएन में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत योजना पटेल ने खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भारत का पक्ष रखा। ‘परिवर्तनकारी और न्यायसंगत कृषि प्रौद्योगिकी’ विषय पर केंद्रित इस चर्चा में उन्होंने एआई, डीपीआई, समावेशी प्रौद्योगिकी, इनोवेशन को बढ़ावा और सतत समाधान जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत किए। इस दौरान पटेल ने बताया कि भारत अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) का उपयोग कृषि शासन के मौलिक पुनर्गठन के लिए कर रहा है, ताकि विशेषज्ञ ज्ञान का लोकतंत्रीकरण हो सके। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी का लाभ केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी न्यायसंगत और सुलभ होनी चाहिए। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन ने पटेल के संबोधन की जानकारी ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा भारतीय राजनयिक योजना पटेल ने कृषि क्षेत्र में भारत के अनुभव से मिली व्यावहारिक जानकारियों को विस्तार से बताया। इनमें किसानों को मौसम, मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल प्रबंधन के बारे में समय पर जानकारी देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, रिमोट सेंसिंग और मोबाइल-आधारित सलाह सेवाओं का उपयोग शामिल है।
कृषि के क्षेत्र में भारत की तरक्की को बताते हुए पोस्ट में आगे कहा गया इसमें जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना, जिसमें सूखा-रोधी फसल की किस्में, कुशल सिंचाई प्रणालियां और सटीक खेती की तकनीकें शामिल हैं। डीपीआई के माध्यम से समावेश सुनिश्चित करने से लेकर सरकार, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्ट-अप और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करके नवाचार के माहौल को बढ़ावा भी दिया जा रहा है। इसके अलावा भारत, दक्षिण अफ्रीका और बेल्जियम की सह-अध्यक्षता वाले ‘यूएन ग्रुप ऑफ फ्रैंडस ऑन साइंस फॉर एक्शन’ ने एसटीआई फोरम के दौरान एक ‘साइड इवेंट’ का आयोजन किया। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास और मानवीय प्रगति के लिए, विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए बहुपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग के महत्व को रेखांकित करना था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इस इवेंट में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया एक ऐसे देश के तौर पर जो यह मानता है कि विज्ञान को पूरी मानवता की सेवा करनी चाहिए, और यह कि आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए, भारत विज्ञान की संभावनाओं और समावेशी शासन की आवश्यकता, दोनों को ही महत्वपूर्ण मानता है। कार्यक्रम में बोलते हुए राजदूत हरीश ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ की एक सशक्त आवाज के रूप में, भारत संयुक्त राष्ट्र में ‘विज्ञान-नीति इंटरफेस’ को आगे बढ़ाने के लिए इस तरह की सार्थक चर्चाओं में लगातार शामिल होता रहेगा।
( रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी )




