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लेखविदेश

अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों की धज्जिया उड़ाई-ओंकार नाथ सिंह


अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस  मादुरो और उनकी पत्नी  सिलिया  फ्लोरेस को शनिवार की रात में बेड रूम से घसीटते हुए बाहर निकाल कर न्यूयॉर्क ले आए और उन्हें  सत्ता से अपदस्त कर गिरफ्तार कर लिया है। उनके ऊपर नार्को आतंकवाद का केस चलाया जाएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सत्ता का हस्तांतरण होने तक वेनेजुएला का शासन अमेरिका ही चलाएगा। हमले के बाद वेनेजुएला सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है।
वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने सरकारी टेलीविजन पर संबोधन में कहा कि अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों की धज्जिया उड़ाई हैं। राष्ट्रपति को अवैध रूप से अगवा किया गया है। सरकार ने इसे साम्राज्यवादी हमला करार देते हुए नागरिक मिलिशिया से सड़कों पर उतरने का आवाहन किया है। दूसरी तरफ़ अमेरिका की इस कार्यवाही के विरोध में  चीन, रूस, नार्थ कोरिया और ईरान का बयान आ गया है जिसमे उन्होंने इस कार्यवाही की निंदा की है और राष्ट्रपति मादुरो को तत्काल छोड़ने को कहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी अमेरिका की कार्यवाही पर चिंता व्यक्त की है। भारत ने भी बयान जारी किया है कि उसकी नज़र इसपे बनी हुई है और शांति की अपील की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर ये कहा, भारत वेनेज़ुएला के लोगों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए अपने समर्थन को फिर से दोहराता है, हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि मुद्दों का समाधान बातचीत के ज़रिए और शांतिपूर्ण तरीक़े से किया जाय ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।” कांग्रेस के जयराम रमेश ने भी बयान दिया कि कांग्रेस पिछले 24 घंटे में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्यवाही पर गहरी चिंता जताती है। अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तय सिद्धांतों का एकतरफा उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। अमेरिका में भी ट्रम्प की कार्यवाही पर कुछ लोग विरोध कर रहे हैं कि बिना सीनेट की स्वीकृत के अमेरिका ने यह कदम कैसे उठा लिया? दुनिया के राजनीतिक गलियारे में लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि अब अमेरिका की नज़र ईरान पर है और जल्द ही ख़ुमानी पर भी कोई कार्यवाह हो सकती है।

बांग्ला देश में शेख हसीना की सरकार को अपदस्त करने के पीछे अमेरिका का हाथ बताया जा रहा है। ईरान में जो इस समय जनता का आक्रोश सड़कों पर दिख रहा है। उसके पीछे भी अमेरिका का ही हाथ बताया जा रहा है। कहा जा रह है कि अमेरिका की यह कार्यवाही तब हुई जब की राष्ट्रपति मादुरो से इस कार्यवाही के लगभग चार घंटे पहले  चीन के राजदूत से उनकी मुलाकात हुई। अमेरिका की इस कार्यवाही पर अभी तक यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह गंभीर कार्यवाही है। इससे तो विकास शील और अविकसित देश पर कोई भी शक्तिशाली देश क़ब्ज़ा कर सकता है और विश्व को एक  तीसरे विश्व युद्ध की तरफ़ धकेल सकता है। अमेरिका ने इसे आपरेशन  को अब्सल्यूट रिज़ॉल्व का नाम दिया और वेनेजुएला में तख्ता पलट कर दिया। अगर इसी प्रकार चीन ताइवान में तख्ता पलट कर दे और रूस किसी की बात नहीं मानते हुए यूक्रेन पर क़ब्ज़ा कर ले तो कमज़ोर देश तो फिर गुलामी की जंजीरों में बंध जाएँगे। इससे तो पूरी दुनिया में प्रलय की स्थित आ जाएगी । इसलिए अमेरिका को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर ही कोई कार्यवाही करनी चाहिए। नार्थ कोरिया के नेता किम जोंग ने तो अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उनके मित्र  मादुरो को शीघ्र नहीं छोड़ा गया तो  उन्होंने विश्व युद्ध की धमकी दी है।

ऐसा नहीं है कि अमेरिका में सब ठीक ठाक है। उन्हें भी बेरोज़गारी की समस्या का सामना अपने देश में करना पड़ रहा है ।यदि उनका यह कदम जनता की इच्छा के विपरीत पड़ा तो उनको घरेलू कठिनाइयों को भी झेलना पड़ सकता है । इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में भी अमेरिका ने क़ब्ज़ा किया  था  मगर उससे उनको नुक़सान ही झेलना पड़ा  और अपमानित होकर वहाँ का प्रशासन छोड़ना पड़ा।उसका मुख्य कारण था कि अमेरिकी सैनिक इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान से युद्ध करते करते थक चुके थे और उन्हें घर की याद आ रही थी। दूसरी तरफ़ अमेरिकी सैनिकों  को वहाँ की जनता  के नफ़रत का सामना भी करना पड़ रहा था । चूँकि  हुसामा बिन लादेन मारा जा चुका था और सद्दाम हुसैन को भी फाँसी हो चुकी थी इसलिए ट्रंप ने अपने पहले शासन काल के अंतिम दिनों में सेना वापसी का एलान किया जिसे जो बाइडेन ने अपने शासन काल में पूरा किया। 

वेनेजुएला में भी अमेरिकी सेना बहुत दिनों तक जनता को कंट्रोल नहीं कर पायेगी जैसा कि  इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान के अनुभवों से पता चलता है। दुनिया भर के लगभग अस्सी देशों में  अमेरिकी सेनाये तैनात हैं। मुख्य रूप से जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया , इटली, ब्रिटेन, स्पेन, बेल्जियम, तुर्की जैसे नाटो और सहयोगी देशों में तथा हाल ही में आतंक विरोधी अभियानों के तहत सीरिया सोमालिया, यमन, इराक़ , नाइजीरिया जैसे देशों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है जिसका मुख्य कारण सहयोगियों को समर्थन , आतंवाद से लड़ना है।  लेकिन यदि अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश वेनेजुएला जैसे देश पर एकतरफा कार्यवाही करे तो निश्चित ही यह एक चिंता का विषय है इसलिए अमेरिका को ऐसी कार्यवाहियों से बचना चाहिए और विश्व को विश्व युद्ध से बचाना चाहिए।

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