
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में हो रहे अंतर्राष्ट्रीय कालीन मेला रहा संतोषजनक
आफताब अंसारी
भदोही। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में चल रहे चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कालीन मेले का आज चौथा दिन रहा। मेले में अमेरिकन कस्टमर के अपेक्षा के अनुरूप न पहुंचने पर भारतीय पवेलियन में मायूसी छाई रही लेकिन उस मायूसी को पूर्ति करने के लिए ब्रिक्स कंट्री के कस्टमरों ने भरपाई की कोशिश की है। उक्त मेले के सम्बंध में सीईपीसी के सदस्य रोहित गुप्ता व पूर्व प्रशासनिक सदस्य एवं वरिष्ठ कालीन निर्यातक उमेश कुमार मुन्ना गुप्ता ने बताया कि जिस जोशो खरोश और उत्साह के साथ हम भारतीय कालीन निर्यातको ने जर्मनी के फ्रैंकफर्ट कालीन मेले में प्रतिभाग करने आये थे उस हिसाब से मेले में सफलता नही मिली। श्री गुप्ता ने कहा मेले में अमेरिकन कस्टमर के न आने से भारतीय पवेलियन में मायूसी छाई रही। लेकिन ब्रिक्स कंट्री के कस्टमर ने मेले की शान रखी और उनके द्वारा इंक्वायरी तथा सैम्पल की गई। श्री गुप्ता ने कहा मेले में अमेरिकन कस्टमर का प्रतिभाग न करना कालीन उद्योग के हित मे नही रहा। कहा अमेरिका से ज्यादातर व्यापार होता रहा लेकिन टैरिफ ने व्यापार की कमर तोड़ दी है। कहा कुछ तो टैरिफ ने व्यापार पर असर डाला तो दूसरी तरफ विश्व की राजनीतिक अस्थिरता ने व्यापार को झकझोर दिया। उन्होंने बताया कि मेले में अमेरिकन कस्टमर न के बराबर आये और जो आये भी थे तो उनके चेहरे पर टैरिफ का डर साफ नजर आ रहा था। कहा टैरिफ ने पूरे व्यापार को तहस-नहस कर दिया है। बहरहाल भारतीय कालीन निर्यातक कुछ खट्टी और मीठी यादों के साथ अपने वतन भारत लौट रहे हैं।




