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उत्तर प्रदेश

यूपी में अब ‘यक्ष एप’ कसेगा अपराधियों पर शिकंजा


अशोक कुमार मिश्र
भारतीय पौराणिक ग्रंथों में यक्ष को रक्षक माना गया है। यक्षों का कार्य धरती के खजानों, वनों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना बताया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी यक्ष के नाम पर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए यक्ष एप बनाया है।यह एप न केवल अपराध नियंत्रण में सहायक होगा, बल्कि पुलिस की निगरानी व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगा। पुलिस तकनीक के प्रयोग में उत्तर प्रदेश कई राज्यों से आगे निकल गया है। प्रदेश में अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस विभाग ने तकनीक आधारित एक और सशक्त पहल कर यह एप तैयार किया है। इस एप के माध्यम से अपराधियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। उत्तर प्रदेश में यह एप अपराधियों पर शिकंजा कसेगा। यह अपराधियों को कहीं से भी खोज निकालेगा। शनिवार 27 दिसंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय पर जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एप का लोकार्पण किया तो लोग यह जानने के लिए उत्सुक हो गए कि यह प्रयोग अपराध पर नियंत्रण कैसे करेगा। लेकिन जैसे ही इस एप के बारे में प्रजेंटेशन दिया गया, पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। यह एप एआई के माध्यम से अपराधियों के लोकेशन का पीछा करेगा और तकनीकी दक्षता की वजह से गिरोहों को भी उखाड़ फेंकने में कारगर होगा।
इस एप में एआई पावर्ड वायस सर्च की भी तकनीक होगी।

इसके माध्यम से अपराधियों का चिह्नांकन व उनकी लोकेशन पता करने में मदद मिलेगी। स्थान छोड़ते ही दूसरे थाने के बीट इंचार्ज को एसएमएस मिल जाएगा।यक्ष एप अभियुक्तों की श्रेणीवार कलर कोडिंग करेगा, यानी घटित अपराध की संवेदनशीलता, समय, प्रयुक्त हथियार के अनुसार अभियुक्त का स्कोर निर्धारण कर उसे श्रेणीबद्ध किया जाएगा। इस एप पर हर अपराधी का पूरा डाटा अपलोड किया जाएगा, जिसमें नाम, पता, फोटो, वीडियो और वॉयस सैंपल शामिल होंगे।यह पहली बार होगा जब अपराधियों की पहचान उनके वॉयस सैंपल के जरिए भी की जा सकेगी। यक्ष एप के जरिए बीट पुलिसिंग को भी और मजबूत किया जाएगा। बीट सिपाही और दरोगा अपने क्षेत्र के अपराधियों का पूरा विवरण इस एप पर फीड करेंगे। पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी भी एप पर उपलब्ध रहेगी, जिससे निगरानी और विश्लेषण आसान होगा। यक्ष एप’ को विशेष रूप से सक्रिय अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और संदिग्ध तत्वों की निगरानी के लिए विकसित किया गया है। एप के जरिए अपराधियों की वर्तमान स्थिति, उनके खिलाफ दर्ज मामलों, जमानत की स्थिति, पैरोल व निगरानी अवधि जैसी जानकारियां रियल टाइम में उपलब्ध होंगी।

इससे स्थानीय पुलिस को त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी। ‘यक्ष एप’ को स्मार्टफोन और टैबलेट पर उपयोग के अनुकूल बनाया गया है। बीट कांस्टेबल से लेकर थानाध्यक्ष तक, सभी स्तर के पुलिसकर्मी इसका उपयोग कर सकेंगे। एप में जीपीएस आधारित लोकेशन ट्रैकिंग, फोटो और दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे अपराधियों की गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। अपराधियों की निगरानी केवल कागजी रजिस्टरों तक सीमित नहीं रहेगी। ‘यक्ष एप’ के माध्यम से यदि कोई अपराधी अपने क्षेत्र से बाहर जाता है या संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो संबंधित थाने को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इससे अपराध होने से पहले ही रोकथाम संभव हो सकेगी। ‘यक्ष एप’ के प्रभावी क्रियान्वयन से कानून- व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। अपराधियों पर लगातार नजर रहने से आम जनता में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा और अपराधियों में पुलिस का डर बना रहेगा।

कुल मिलाकर, ‘यक्ष एप’ उत्तर प्रदेश पुलिस के डिजिटलीकरण और स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो अपराध नियंत्रण की रणनीति को नई धार देगा। भारतीय पौराणिक ग्रंथों में यक्ष को देवयोनि का प्राणी माना गया है। इन्हें धन, संपदा, प्रकृति और गुप्त निधियों का रक्षक कहा गया है। कुबेर को यक्षों का अधिपति माना जाता है।यक्षों का कार्य धरती के खजानों, वनों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना बताया गया है। यही कारण है कि कई धार्मिक कथाओं में यक्ष अनुशासन, संरक्षण और न्याय के प्रतीक के रूप में दिखाई देते हैं। चाहे पौराणिक दृष्टि से देखें या आधुनिक प्रशासनिक संदर्भ में, यक्ष का मूल उद्देश्य संरक्षण और अनुशासन ही रहा है। आज के दौर में यह नाम तकनीक और सुरक्षा का प्रतीक बनकर उभर रहा है, जो समाज में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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