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चंदौली

लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए मजबूत न्यायपालिका और बेहत्तर न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्टर अनिवार्य- योगी

इंटीग्रेटेड कोर्ट काम्प्लेक्स राष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्क साबित होंगे- सीजेआई

चन्दौली को मिला 286 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड कोर्ट

चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली में आज न्याय व्यवस्था को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ₹286 करोड़ की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का भव्य शिलान्यास किया। इस मौके पर देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
शिलान्यास के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक यात्रा के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस बात पर विशेष जोर दिया था कि न्याय व्यवस्था आम नागरिक तक सरलता से पहुंचे। इसके लिए इंटीग्रेटेड मॉडल जरूरी हैं। क्योंकि यहां न्याय से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। उनकी सोच ने इस पहल को दिशा दी।
योगी ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को लेकर देश में व्यापक सुधार हुए हैं। अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है। उसी प्रेरणा से न्यायिक व्यवस्था को भी आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर, पार्किंग और कैंटीन सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं होंगी। इससे अधिवक्ताओं को जर्जर चैंबरों में काम करने की मजबूरी नहीं रहेगी। उन्हें हाई राइज भवनों में बेहतर व सम्मानजनक कार्यस्थल मिलेगा।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि चीफ जस्टिस की प्रेरणा से यह सुविधा उत्तर प्रदेश के छह जिलों- चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया में शुरू की जा रही है।
सीएम योगी ने बताया कि चीफ जस्टिस की प्रेरणा से यह सुविधा यूपी के छह जिलों- चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया में शुरू की जा रही। अन्य जिलों में भी अगले कुछ महीनों में इसी तरह की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इसे भारत के न्यायिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए मजबूत न्यायपालिका और बेहतर न्यायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर अनिवार्य है। न्यायिक कार्यों को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संसाधनों की कोई कमी नहीं है, केवल इच्छाशक्ति के साथ काम करने की जरूरत है।


सीएम ने चंदौली सहित सभी जिलों के अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के संघर्ष की सराहना की। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के साथ समन्वय कर सरकार ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए हैं।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह जब भी अन्य राज्यों का दौरा करेंगे, तो वहां की राज्य सरकारों और हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश के इस मॉडल का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।
कहा- संविधान में जिला न्यायपालिका को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक राज्य का अपना हाईकोर्ट होगा, जिलों में जिला कोर्ट होंगे। न्यायालयों को मौलिक अधिकारों, मानवीय अधिकारों सहित अन्य संवैधानिक अधिकारों को लागू करने की व्यापक शक्तियां प्राप्त होंगी। संविधान निर्माताओं की मंशा यही थी कि यदि जिला स्तर पर न्यायपालिका सशक्त होगी, तो ‘एक्सेस टू जस्टिस’ का सपना साकार होगा। आम नागरिक को अपने ही क्षेत्र में न्याय मिल सकेगा।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है, तो वह अपने ही जिले में जाकर न्याय पा सके, इसी उद्देश्य से जिला न्यायपालिका की अवधारणा विकसित की गई। यह व्यवस्था न्याय को आम आदमी के और अधिक करीब लाने का माध्यम है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि संवैधानिक सोच को धरातल पर उतारने के लिए यूपी सरकार ने 10 इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने की घोषणा की थी, जिनमें से छह का शिलान्यास आज किया गया है। इन परिसरों के निर्माण से उत्तर प्रदेश, पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा। ये इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स राष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्क साबित होंगे।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह जब भी अन्य राज्यों का दौरा करेंगे, तो वहां की राज्य सरकारों और हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश के इस मॉडल का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, ताकि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की न्यायिक सुविधाएं विकसित की जा सकें।
इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स आने वाले कम से कम 50 वर्षों तक न्यायिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।
सीजेआई कहा कि यह क्षेत्र बाबा स्वामी नाथ सहित अनेक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है लेकिन आज इसके इतिहास में एक नई कड़ी जुड़ गई है। यहां न्याय के मंदिरों की स्थापना हो रही। वीडियो प्रेजेंटेशन से यह स्पष्ट है कि ये इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स आने वाले कम से कम 50 वर्षों तक न्यायिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।
CJI ने कहा कि इन परिसरों में अधिवक्ताओं के लिए बेहतर और आधुनिक कार्यस्थल होंगे। सबसे अहम यह है कि आम नागरिक, जिसे ‘कंज्यूमर ऑफ जस्टिस’ कहा जाता है, उसके लिए भी सुविधाजनक और सुगम व्यवस्थाएं की गई हैं।
उन्होंने इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार और इलाहाबाद हाईकोर्ट को बधाई दी। साथ ही जिन जिलों-महोबा, अमेठी, औरैया, हाथरस, चंदौली और शामली में शिलान्यास हुआ है, वहां की बार एसोसिएशन, पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
CJI सूर्यकांत ने सीएम योगी का विशेष धन्यवाद किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जहां संभव हो, वहां महिला अधिवक्ताओं के लिए अलग सुविधाएं विकसित की जाएं। इन परिसरों में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बनाया जाए ताकि न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
1500 करोड़ की लागत से कोर्ट कांप्लेक्स का निर्माण कराया जा रहा।समारोह में सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली सहित सर्वाेच्च न्यायालय के 5 और हाईकोर्ट के 18 जज भी मौजूद रहे।

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