
स्पष्टता की शुरुआत अस्पष्टता के साथ होती है : प्रो. आशीष बाजपेयी
वाराणसी।काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सभागार में कृष्णमूर्ति फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सचिव, विश्वनाथ अल्लूरी की पुस्तक ‘दी एनलाइटेंड मैनेजर’ का विमोचन हुआ। इस अवसर पुस्तक पर एक परिचर्चा का आयोजन हुआ। इस परिचर्चा में पुस्तक के लेखक विश्वनाथ अल्लूरी और प्रबंध शास्त्र संस्थान, बीएचयू के निदेशक प्रो. आशीष वाजपेयी शामिल रहे। परिचर्चा की शुरुआत ‘एक्शन’ और ‘एक्टिविटी’ के बीच के फ़र्क को समझने से शुरू हुई। वक्ताओं ने कहा कि बिना किसी उद्देश्य और सचेतता के साथ किया गया कार्य महज ‘एक्टिविटी’ है, जबकि किसी उद्देश्य के लिए सचेतता के साथ किया जाने वाला कार्य ‘एक्शन’ कहलाता है। विश्वनाथ अल्लूरी ने कहा कि मैं अक्सर देखता हूँ, ऐसे लोगों की तादाद बढ़ रही है ।एक्शन’ नहीं।परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रो. बाजपेयी ने कहा कि यह पुस्तक ना सिर्फ कॉर्पोरेट जीवन बल्कि, जीवन को समग्र रूप से समझने के लिए एक दृष्टि देती है। उन्होंने कहा कि स्पष्टता की शुरुआत अस्पष्टता के साथ ही शुरू होती है”। जीवन में कंफ्यूज होना एक बात है। लेकिन जीवन में बेहतरी के लिए यह जरूरी बात है कि हमें ‘कंफ्यूजन’ के बारे में जागरूकता होनी चाहिए।
परिचर्चा में आगे विश्वनाथ अल्लूरी ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत में हाल के दिनों में काम के घंटों पर छिड़ी बहस के संदर्भ में कहा कि – “काम के 70-100 घंटे की बहस के बजाय हमें इस बात को तरजीह देना चाहिए कि कर्मचारी अपने काम में दिल-दिमाग से कितना शामिल है”। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में बेहतरी के लिए जरूरी है कि हम ‘स्वीकारोक्ति’ और ‘अस्वीकारोक्ति’ के द्वैत से बाहर निकलें। इस अवसर पर परिचर्चा के पूर्व वक्ताओं और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान भी हुआ। इस क्रम में कृष्णमूर्ति फाउंडेशन, वाराणसी के सचिव एस. एन. दुबे ने अंगवस्त्रम देकर पुस्तक के लेखक विश्वनाथ अल्लूरी को, वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट की प्राचार्या प्रो. अल्का सिंह ने अंगवस्त्रम देकर प्रबंध शास्त्र संस्थान, बीएचयू के निदेशक प्रो. आशीष वाजपेयी को, कृष्णमूर्ति फाउंडेशन, वाराणसी की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी स्मृति वर्मा ने अंगवस्त्रम देकर अटल इन्क्यूबेशन सेंटर के समन्वयक प्रो. पी. वी. राजू को, एस. एन. दुबे ने अंगवस्त्रम देकर कृष्णमूर्ति फाउंडेशन ऑफ इंडिया के ट्रस्टी ए. कुमारस्वामी को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. योगेन्द्र जैन ने किया धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्या प्रो. अल्का सिंह ने दिया।




