बलिया: साहित्यकार रामबहादुर राय को भोजपुरी ‘गांव के थाती’ पुस्तक पर जगन्नाथ सिंह पुरस्कार से सम्मानित

बलिया। अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के 28वें अधिवेशन जो अमनौर (सारण) आयोजित किया गया। बिहार के कैबिनेट मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने राम बहादुर राय की भोजपुरी संस्मरण ‘गांव के थाती’ पुस्तक पर जगन्नाथ सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया। यह भोजपुरी की वह संस्था है जिसके अध्यक्ष डॉक्टर हजारी प्रसाद द्विवेदी रह चुके हैं।राम बहादुर राय (भरौली) बलिया के रहने वाले हैं। इन्होंने पहले हिन्दी में लिखना आरंभ किया। अपनी लेखनी को पुस्तक के रूप में ढ़ाला। पहली पुस्तक जीवन के विविध रंग,अनकही संवेदनाए, आदमी के कई रंग,धरती के परिंदे आदि रचनाएं हैं। गौरतलब है कि ख्यातिल्लब्ध साहित्यकार डाॅ विवेकी राय का ननिहाल इन्हीं के घर है। डाॅ साहब भोजपुरी के बड़े साहित्यकार रहे तो राम बहादुर राय का ध्यान भी भोजपुरी की तरफ बरबस ही आकृष्ट होने लगा। भोजपुरी लिखना शुरू कर दिया। सबसे पहले भोजपुरी के मान्यता के सम्बन्ध में सोचकर भोजपुरी के लिए पहली ओर अपनी पांचवी पुस्तक भोजपुरी के मान्यता देंई ए सरकार लिखा ।
इस किताब में सारी कविताएं सिर्फ और सिर्फ भोजपुरी की मान्यता की मांग के सम्बन्ध में ही है। इसी बीच विद्यावाचस्पति का सम्मान पत्र भी मिला। कुछ वर्ष बाद विद्यासागर सम्मान से भी नवाजे गये। हालांकि साझा काव्य और गद्य संकलन लगभग तीस से अधिक ही लिखा साथ ही साथ अनगिनत पत्र पत्रिकाओं में कहानी,कविता, निबंध छपते रहे हैं। लगातार छप भी रहे हैं। एक और भोजपुरी की पुस्तक प्रकाशित हुई जिसका शीर्षक है हमार गाँव जो काव्य संग्रह है। भोजपुरी कथेतर साहित्य की प्रतिमान स्थापित करने वाली पुस्तक है। भोजपुरी संस्मरण के रूप में गाँव के थाती प्रकाशित हुई। राम बहादुर राय मूलत: ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। इनके हृदय में पूरा गाँव ही बसा है। इनकी लेखनी में अक्सर गाँव, गरीब, किसान, मजदूर और इनकी व्यथा देखने को मिलती है। भोजपुरी के प्रति विशेष लगाव और गाँव को गाँव की संस्कृति और संस्कार को बचाने की कोशिश लेखनी के माध्यम से करते रहते हैं। विदित हो कि राम बहादुर राय अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन की कार्यसमिति के राष्ट्रीय सदस्य तो हैं साथ ही साथ भोजपुरी साहित्य विकास मंच कोलकाता के राष्ट्रीय संगठन पदाधिकारी एवं जिलाध्यक्ष भी हैं।




