
Report by-त्रिलोकी नाथ राय
बलिया/दुबहड़।कछुआ रामपुर गाव मे श्रीलक्ष्मी पूजन कार्यक्रम बाल संघ कमेटी के तत्वाधान में श्रीराम कथा के दूसरे दिन बुधवार को अयोध्या से पधारी प्रसिद्ध कथा वाचिका पूज्य आरती पाठक जी ने सती का शरीर त्याग व शिव पार्वती विवाह के प्रसंग सुनायी। इसको सुनकर कथा पांडाल में मौजूद श्रोता भाव विभोर हो गए।
कथा वाचिका पूज्य आरती पाठक जी ने कही की भगवान शिव ने सती का त्याग रामभक्ति को उजागर करने के लिए किया था।पार्वती श्रद्धा की प्रतीक है तो शिवजी विश्वास के प्रतीक है।श्रद्धा और विश्वास मनुष्य को राम कथा के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने भक्तो को समझायी की श्रीरामकथा जीवन में सही मार्ग दिखाने और धर्म भक्ति व संकल्प की शक्ति को समझने में सहायक है। उन्होंने कही कि भगवान शिव और पार्वती जी के विवाह का प्रसंग बहुत ही मंगलकारी है। जो इस कथा को सुनता है उसके मनोरथ पूर्ण होते हैं। भोले भंडारी वास्तव में बहुत भोले, दयालु और कृपालु हैं। वह क्षण भर में ही लोगों को पाप से मुक्त कर देते हैं। नाम ही है उनका शिव है अर्थात कल्याण करने वाला। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की बारात भी अछ्वुत थी।आगे कही की पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं। उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उनकी शादी की चिंता सताने लगी। माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया भगवान शिव की वर माला के समय सभी देवी देवताओं ने फूलो की वर्षा किए। महिलाओं ने मंगल गीत व विवाह की खुशियां मनायी।इस मौके पर पुजारी दयाशंकर शास्त्री, कल्याण सिंह,राहुल सिंह, संतोष यादव, राकेश साहनी, अजीत यादव, मिथलेश पासवान, पिंटू यादव,उमेश साहनी, राजू साहनी, रितेश यादव, ऋषभ यादव, अमर साहनी,चुन्नू यादव,धनजी साहनी, राजू साहनी, रोहित साहनी,अनूप साहनी, आशीष यादव, मनीष यादव,संजय यादव,रोहित यादव सहित अन्य महिला पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।




