
प्रहलाद घाट स्थित गंगा तट पर महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर लिया आशीर्वाद
हिंदुस्तान संदेश(सुशील कुमार मिश्रा)
वाराणसी।धर्म नगरी काशी (वाराणसी)में लोक आस्था के महापर्व चार दिवसीय डाला छठ के दूसरे दिन रविवार को ‘खरना’ की रस्म निभाई गई। व्रती महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखा। सूर्यास्त के बाद विधि-विधान से खरना पूजा की गई। व्रतियों ने पूरे आस्था के साथ छठ माता को गुड़, दूध और चावल से बनी खीर, गेहूं की रोटी और केले का प्रसाद अर्पित किया। माता रानी की पूजा के उपरांत व्रती महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण कर उपवास तोड़ा। फिर यही प्रसाद परिवारजनों तथा आस-पड़ोस के लोगों के बीच वितरित किया गया। इसी के साथ छठ महापर्व के मुख्य अनुष्ठान 36 घंटे के निराजल व्रत का संकल्प लिया। इसी के साथ व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निराजल कठिन व्रत शुरू हो गया। व्रती महिलाएं सोमवार शाम छठ मइया की गीत गाते हुए सिर पर पूजा की देउरी रख गाजे बाजे के साथ सरोवर, नदी गंगा तट पर जाएगी और समूह में छठ मइया की कथा सुन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर घर लौटेंगी। मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण करेंगी। पर्व पर वेदी को सजाने का कार्य भी परिजनों ने पूरा कर लिया है। वाराणसी में गंगा के सामनेघाट से लेकर भैंसासुर घाट,बरेका सूर्य सरोवर तक वेदिकाएं बनाकर जगह घेर दिया है। गंगा और वरुणा तट पर जहां पर भी व्रती महिलाओं के परिजनों को जगह मिली, वहीं वेदी बनाया है। तीसरे दिन संध्या अर्घ्य के समय भगवान भाष्कर को विशेष प्रकार का पकवान “ठेकुवा” और मौसमी फल चढ़ाया जायेगा। उधर,महापर्व पर जिले के शहरी और ग्रामीण अंचल में पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के गीत गूंज रहे है। हालाकि आज भी छठ के पारम्परिक गीत ‘केरवा के पात पर, उगा हो सूरज देव भईल अरग के बेर’, केरवा जे फरले घउद में ता पर सुग्गा मंडराए, मरबऊ रे सुगवा धनुख से सुगा गिरे मुरझाए’,हम तोहसे पुछिले बरतिया करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी आदि गीत व्रती महिलाओं और उनके परिजनों में खासा लोकप्रिय है।सूर्य उपासना के पावन पर्व पर प्रति रितिका तिवारी ने बताया कि छठ मैया की आशीर्वाद बना रहता है। प्रहलाद घाट की निवासी रत्नेश मिश्रा ने बताया कि जब से मां व्रत रह रही है तब से मैं मैं छठी मैया का व्रत एवं पूजन करती हूं।बुलानाला निवासी ने बताया कि जब से मेरी स छठ मैया के व्रत रहती हैं तब से घर में खुशी ही खुशी रहती हैं। शिवपुरवा निवासी सुनीता उपाध्याय ने बताया कि जब से मैं छठी मैया की व्रत चालू की हूं तब से मेरे घर में सुख समृद्धि बड़ी है। प्रहलाद घाट निवासी मणिमला पांडे ने बताया कि छठी मैया के आशीर्वाद से मुझको सबकुछ प्राप्ति हो गई है अब मैं छठ मैया का उद्यापन करचकी हूं।




