वाराणसी:जो भूले है उन्हें याद करना होगा,जो बिछुड़ गए उन्हें खोजना होगा

पूर्वजों और परम्पराओं के सहारे दिलों की दूरी कम हो सकती है -सूर्य प्रकाश
हिन्दू और मुसलमानों के पूर्वज एक, उनकी जड़े भारत की जातियों में ही है
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी।विशाल भारत संस्थान एवं हमारे पुरखे न्यास के संयुक्त तत्वावधान में “हमारे पूर्वजों की परम्पराएं एवं विरासत” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन लमही के सुभाष भवन में किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगदगुरू बालक देवाचार्य जी महाराज, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय संघचालक एवं हमारे पुरखे न्यास के संस्थापक अध्यक्ष सूर्य प्रकाश टोंक एवं मुख्य अतिथि हमारे पुरखे न्यास के ट्रस्टी डॉ० कपिल त्यागी ने सुभाष मंदिर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण व आरती की एवं दीपोज्वलन कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया।अध्यक्षता करते हुए जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि जब हमारे पूर्वज एक ही है तो सभी एक दूसरे को स्वीकार करे। भारत की महान संस्कृति स्वीकार्यता की रही है ,भगवान राम ने सबको स्वीकार किया।मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक एवं हमारे पुरखे न्यास के अध्यक्ष सूर्य प्रकाश ने कहा कि कुछ हम भूले है, कुछ वो भूले है। दोनों को याद करना होगा, तब पूर्वज याद आएंगे, रिश्ते याद आएंगे,संगोष्ठी के संयोजक विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हमारे पुरखे न्यास के न्यासी डॉ० राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि भारत में रहने वाला मुसलमान न अरबी है ,न तुर्की और न मंगोल । शेख टाइटल लगा कर नकली अरबी बनने से अच्छा है अपने पूर्वजो की टाइटल लगाकर असली भारतीय बनना।मुख्य अतिथि डॉ० कपिल त्यागी ने कहा कि हमारी एक शाखा भले ही दुसरे धर्म को मान रही हो लेकिन उनके साथ खान पान का और संस्कृति का रिश्ता कही अलग नही हुआ । दिलो में एहसास पैदा करने की जरूरत है।परम्पराओ पर शोध पत्र आभा उपाध्याय ने प्रस्तुत किया, 100 परम्पराओ को वही बताया जो हिन्दू और मुसलमान एक ही तरह से मनाते है।संगोष्ठी का संचालन डॉ० अर्चना भारतवंशी ने किया एवं धन्यवाद डॉ० निरंजन श्रीवास्तव ने दिय।




