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उत्तर प्रदेशसोनभद्र

सोनभद्र:खनन क्षेत्र में सुरक्षा के नाम पर हो रही महज खानापूर्ति

> प्रशासनिक लापरवाही से खदानों में हो रही मजदूरों की मौतें
> पत्थर खदान कंपनी एवं प्रोपराइटर का नाम बदल कर मौत पर डाला जा रहा पर्दा

राकेश चंदेल
हिन्दुस्तान संदेश। जनपद में हो रहे अवैध खनन को रोकने में प्रशासनिक अमला नाकाम हो चुका है। प्रशासन और खनन माफियाओं की मिलीभगत से अवैध खनन की जड़ें इतनी गहरी व मजबूत हो चुकी हैं कि अब इन खदानों में हो रही मजदूरों की मौतों का भी कोई असर नहीं पड़ रहा है। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि किसी खदान में कोई हादसा होता है तो उसका नाम बदल दिया जाता है ताकि लोगों को यह लगे कि उक्त खदान बंद कर दी गई जबकि उसी खदान को फिर से नया नाम देकर अवैध खनन का कार्य बेखौफ जारी रहता है। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी खनन विभाग को नहीं रहती बल्कि यह सब उसी के संरक्षण में ही किया जा रहा है। जिले में डाला बिल्ली खनन क्षेत्र के आराजी संख्या 4949 ख की खदान मौत का कुआं या मौत की पहाड़ी बन चुकी है। इसकी जानकारी होने के बावजूद प्रशासनिक अमले को कोई फिक्र नहीं है। अभी कुछ दिनों पहले बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में एक गरीब मजदूर की मौत हो गई, बावजूद इसके सुरक्षा मानकों के विपरीत बगैर सुरक्षा उपकरण के पत्थर खदान में कराएं जा रहे खनन कार्य में० अजंता मिनरल माइनिंग पार्टनर, विजय कुमार आराजी संख्या-4949 ख डोलो स्टोन खनन पट्टे का क्षेत्र-5.880 हे० है। सुरक्षा मानकों के विपरीत चल रहे खनन कार्य।
पर्यावरण, मजदूरों की जान की नहीं है परवाह
जनपद के खनन उद्योग में व्यक्तिगत लाभ के लिये न तो पर्यावरण की परवाह की जा रही है और न ही कार्य कर रहे मजदूरों के जान की। जिले के बर्दिया पत्थर खनन क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जहां आराजी संख्या 941 ख, की खदान मौत के कुंए में तब्दील हो चुकी है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसकी जानकारी होने के बावजूद प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे हुए है। यहां भी खनन सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। अवैध खननकर्ता सारे नियमों को ताक पर रखकर खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बर्दिया खनन क्षेत्र के आराजी संख्या 941ख, में पट्टाधारक मेसर्स अली स्टोन वर्क्स पार्टनर अकबर अली पुत्र मजनूं भाई द्वारा आराजी संख्या 941 ख, पट्टे का क्षेत्रफल 2.00 एकड़ के स्वीकृत खनन पट्टे में स्पष्ट दिखाई दे रहा है, इसके बावजूद खनन विभाग अपनी आंखें मूंदकर अवैध खनन को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है। हादसे में चालक की मौत के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी पर तरह-तरह के सवाल उठते रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की लंबी-चौड़ी फौज होने के बावजूद पत्थर खदान क्षेत्र में एनजीटी के निदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर पट्टाधारकों द्वारा काफी गहरी हो चुकी खदानों में बगैर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराएं ही मजदूरों से बेखौफ कार्य कराया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी इस गोरखधंधे में संलिप्त पट्टाधारकों पर कार्रवाई करने के बजाएं चुप्पी साधे बैठे हैं।

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