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वाराणसी

रचित अग्रवाल की आयरनमैन यात्रा : दृढ़ संकल्प, मेहनत और साहस की कहानी


सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
रचित अग्रवाल, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में पले-बढ़े हैं, डॉक्टर राजीव अग्रवाल के पुत्र हैं, जो जीडी बिनानी मिर्जापुर कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके हैं। रचित ने प्रारंभिक शिक्षा मिर्जापुर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई IIIT इलाहाबाद (प्रयागराज) से की और प्रबंधन में स्नातकोत्तर की डिग्री IIM कलकत्ता से प्राप्त की। वर्तमान में रचित नोएडा में स्थित अपनी कंपनी AdmitKard का सफल संचालन कर रहे हैं, जो विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा हेतु मार्गदर्शन प्रदान करती है। हाल ही में रचित ने अपनी सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रेरणास्पद उपलब्धि हासिल की — Ironman Hamburg, Germany में आयोजित विश्व प्रसिद्ध एंड्योरेंस रेस को पूरा किया। इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को एक ही दिन में 3.8 किलोमीटर तैराकी, 180 किलोमीटर साइकिलिंग और 42.2 किलोमीटर की मैराथन दौड़ पूरी करनी होती है। इस यात्रा की तैयारी केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं थी। मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और लगातार समर्पण भी उतने ही आवश्यक थे। कई महीनों की कठिन ट्रेनिंग, सुबह-शाम का अभ्यास, मौसम की परवाह किए बिना घंटों की मेहनत — रचित ने हर चुनौती को पूरे आत्मविश्वास और धैर्य के साथ स्वीकार किया।रफ्तार के उतार-चढ़ाव, थकावट और शारीरिक सीमाओं के बावजूद रचित का हौसला अडिग रहा। हर कदम पर उन्होंने अपनी सीमाओं को पीछे छोड़ा और अंततः Ironman Hamburg की फिनिश लाइन पार कर ली। उनकी यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि जब मन में सच्चा संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। रचित की यह यात्रा उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरे समर्पण के साथ प्रयासरत हैं।

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