
विषम परिस्थिति से गुजर रहा है कालीन उद्योग, बेल आउट से मिलेगी संजीवनी: संजय गुप्ता,बुनकर कालीन उद्योग के हैं रीढ़, 10 फीसदी आर्थिक सहायता से उभरेगा उद्योग: विधायक दीनानाथ भाष्कर
कालीन उद्योग है हमारी वेरासत इसे बचाने की है जरूरत: पीयूष बरनवाल,कार्पेट एक्सपो मार्ट में आए मंत्री राकेश सचान के सामने निर्यातकों ने रखी अपनी बात
आफताब अंसारी
भदोही। भारतीय कालीन उद्योग को अमेरिकी टैरिफ ने संकट में डाल दिया। इस संकट से जहां निर्यातकों के सामने निर्यात आर्डर के लाले पड़ गए है तो वहीं इससे जुड़े लाखो बुनकरों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। शुक्रवार को चौरी रोड स्थित कार्पेट एक्सपो मार्ट में आए काबीना मंत्री सूक्ष्म एवं लघु उद्योग राकेश सचान के सामने निर्यातकों ने कालीन उद्योग पर लगे अमेरिकी टैरिफ से उद्योग की एक-एक समस्या से अवगत कराया। इस मौके पर सीईपीसी के चेयरमैन कुलदीप राज वट्टल ने मंत्री के सामने उद्योग की समस्या गिनाते हुए कहा कि अमेरिकी टैरिफ के काला बादल कालीन उद्योग पर छाया हुआ है जिससे निर्यातकों व बुनकरों के सामने एक बहोत बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। उन्होंने कहा भदोही से 62 फीसदी कालीन अमेरिका को निर्यात होता है। 50 फीसदी टैरिफ लगने की वजह से उद्योग विषम परिस्थिति से गुजर रहा है। कहा उद्योग से लगभग 20 लाख लोग जुड़े हुए है जिनका जीवकोपार्जन इसी से चलता है। कालीन उद्योग 17 हजार करोड़ रुपया विदेशी मुद्रा अर्जित कर भारत सरकार को देता है। कहा सरकार उद्योग को बचाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करे। रवि पाटोदिया ने कहा टैरिफ के प्रभाव की वजह से तत्त्काल रूप से बेल आउट की जरूरत है भारत सरकार इसे मुहैया कराए। कहा हमारे शिपमेंट रुक गए, हमारे पास आर्डर नही है, हमें आर्थिक सहयोग मिले तबतक की जबतक टैरिक का मामला हल न हो जाये। सरकार इसपर त्वरित निर्णय ले। संजय गुप्ता ने कहा आज उद्योग बहोत ही विषम स्थिति से गुजर रही है। उद्योग हमारी विरासत है इसे बचाना हम सबकी जिमेदारी है। बेल आउट से उद्योग को संजीवनी मिलेगी। पीयूष बरनवाल ने कहा हमारे जो बुनकर मजदूर है अगर वे दूसरे किसी काम मे चले गए तो उन्हें वापस लाना बहोत मुश्किल होगी। आर्थिक सहायता सरकार दे। अशफ़ाक़ अंसारी ने कहा मार्ट में कम से कम दो तीन मेला लगना चाहिए।
इसमे दुकान भी है उन्हें लोगो में आवंटित किया जाय ताकि मार्ट का रखरखाव हो सके। सांसद डॉ विनोद बिंद ने कहा यह एक ऐसा उद्योग है जिसमे 30 लाख लोग जुड़े है लेकिन टैरिफ ने उद्योग की कमर को झुका दी है। सरकार उद्योग को बचाने के लिए आर्थिक सहायता दे। कहा बड़े उद्यमी तो कहीं भी जा सकते है लेकिन बुनकर मजदूर कहीं के भी नही होंगे। विधायक दीनानाथ भाष्कर ने कहा उत्तर प्रदेश सरकार 10 फीसदी टैरिफ पर सब्सिडी तत्त्काल दिया जाए ताकि बुनकरों को सहूलियत मिल सके। और कालीन का अस्तित्व को बचाया जा सके। श्री भाष्कर ने कहा जहां जहां बुनकर है उन्हें फिक्स बिल कर विधुत आपूर्ति दी जाए ताकि उनको किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। वहीं मंत्री ने एक-एक कर सभी निर्यातकों की बातों को सुनकर आश्वस्त किया कि 10 फीसदी आर्थिक सहायता राशि को लेकर सरकार से प्रयास करेंगे ताकि कालीन उद्योग पर आए संकट के बादल छंट सके। इस अवसर पर वासिफ अंसारी, संजय गुप्ता, असलम महबूब, इम्तियाज़ अंसारी, सूर्यमणि तिवारी, अनिल सिंह,हुसैन जाफर हुसैनी, रजा खां, गुलाम सरफुद्दीन अंसारी, शमीम अंसारी, विमल बरनवाल, हाजी अब्दुल सत्तार अंसारी, नीरज बरनवाल, एजाज अहमद अंसारी, शाहकार हुसैन अंसारी, आरिफ अंसारी, अशरफ अली हाफिज जी, अब्दुल कादिर अंसारी, हाजी फैयाज अंसारी आदि निर्यातक मौजूद रहे।




