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भदोही:अमेरिका की दादागिरी, 50 फीसदी टैरिफ ने कालीन उद्योग पर लाया संकट

कालीन उद्योग से जुड़े लाखो-लाख बुनकरों व मजदूरों के सामने संकट के बादल: आरिफ सिद्दीकी

जबतक टैरिफ का मामला हल नही होता तब तक सरकार बुनकरों व मजदूरों को दे स्पेशल पैकेज

ब्यूरो चीफ आफताब अंसारी की रिपोर्ट…

भदोही। अमेरिका की दादागिरी जो कालीन उद्योग को वैश्विक मंदी की ओर ले जा रहा है। अमेरिका द्वारा पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया उसके बाद उसे बढाकर 50 फीसदी कर दिया गया जिससे कालीन उद्योग पर संकट के बादल छा गए। उक्त बातें समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव आरिफ सिद्दीकी अपने पचभैया स्थित आवास पर रविवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कही। श्री सिद्दीकी ने कहा  लगभग 100 वर्ष बाद कालीन उद्योग पर अमेरिका द्वारा 50 फीसदी टैरिफ लगाने से कालीन उद्योग संकट में आ गया। कहा आज कालीन उद्योग से जुड़े लाखो लोगो के सामने रोजो-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। उद्योग से जुड़े डिजाइनर, डायर, बुनकर, धुलाई, पेचाई, टेढाई, रंगकटा, काती खोलाई सहित लाखो मजिलायें जो अपने घरों में रहकर कालीन सम्बंधित कार्य कर अपने परिवार का जीविकापार्जन की साधन बनती थी आज वे बेरोजगारी का दंश झेल रही हैं। श्री सिद्दीकी ने कहा उद्योग से जुड़े लाखो-लाख बुनकर, मजदूर भदोही छोड़कर अपने बच्चों की खातिर पलायित कर रहे है। भदोही जनपद के लगभग 16 लाख कालीन बुनकर अन्य जगहों पर जाने के लिए विवश हो गए। उन्होंने कहा कालीन की रीढ़ कहे जाने वाले मजदूरों के पलायन के बाद उद्योग का पतन हो जाएगा। श्री सिद्दीकी ने कहा टैरिफ का मामला अंतर्राष्ट्रीय है इसमे चाहिए कि प्रधानमंत्री जी पहल करें और कालीन उद्योग की नैया को डूबने से बचाएं ताकि बुनकरों व मजदूरों के सामने जो आर्थिक स्थिति सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है वह दूर हो। श्री सिद्दीकी ने कहा जब तक टैरिफ का मामला हल नही हो जाता तब तक सरकार को चाहिए कि वे बुनकरों व मजदूरों को स्पेशल पैकेज प्रदान करें ताकि उनके ऊपर आर्थिक संकट का बोझ न पड़ सके। श्री सिद्दीकी ने कहा 25 अगस्त सोमवार को भदोही उपजिलाधिकारी को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम सम्बोधित ज्ञापन सौंपने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा अगर सरकार बुनकरों व मजदूरों तथा कालीन उद्योग से जुड़े लोगों को स्पेशल पैकेज का एलान नही करती तो समाजवादी पार्टी बुनकरों व मजदूरों तथा निर्यातकों के साथ आंदोलन के लिए बाध्य होगी। इस मौके पर हाजी सुहेल अंसारी, आयुष मौर्या, जुल्फिकार अंसारी, रमेशचंद मौर्या, सहाबुद्दीन मंसूरी, राजकुमार यादव आदि प्रमुख रूप से रहे।

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