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बरेली : नाम ही नहीं, विचार, निर्णय और राष्ट्र के प्रति समर्पण में थे अटल – स्वतंत्र देव सिंह

बरेली। अटल जी की जन्म शताब्दी पर आयोजित भव्य समारोह में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई करोड़ों देशवासियों के हृदय में सदैव दीपक की थोड़ा जलते रहेंगे। एक राजनेता नहीं, बल्कि जननायक, प्रखर वक्ता, ओजस्वी कवि, संवेदनशील पत्रकार और भारत माता के सच्चे सपूत थे। उनकी वाणी में कविता और निर्णयों में दृढ़ता थी, उन्हें युगद्रष्टा नेता बनाती है। उन्होंने कहा कि अटल जी की जीवन यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं से प्रारंभ होकर जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक संघर्षों से गुजरते हुए लोकतांत्रिक सत्ता के सर्वोच्च शिखर तक पहुँची। उनके लिए राजनीति सत्ता का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम थी। यही कारण है कि वे सदैव सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहे।
उन्होने अटल जी के संसदीय जीवन, आपातकाल के बाद की भूमिका, संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में दिए गए ऐतिहासिक भाषण, पोखरण परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध के दौरान साहसिक नेतृत्व तथा सुशासन की मिसाल बने उनके प्रधानमंत्री काल का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और दूरसंचार क्रांति जैसी पहलों ने भारत के विकास की मजबूत नींव रखी। अटल जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि संगठन राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला होता है, जहाँ से निकलकर कार्यकर्ता वैश्विक मंच पर भी देश का नेतृत्व कर सकता है। उनका संपूर्ण जीवन ईमानदारी, नैतिकता, संवेदना और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण है। अटल जी का नाम ही नहीं, उनके विचार, निर्णय और राष्ट्र के प्रति समर्पण भी अटल था। आज उनकी जन्म शताब्दी पर हम सभी को उनके आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र सेवा के पथ पर आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।

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