वाराणसी:अनाज बैंक ने अनाज वितरित कर मनाया 33 साल के यात्रा का जश्न

भूख पीड़ितों की नियमित सेवा ही अनाज बैंक की पहचान,अनाज बैंक ने 50 महिला खाताधारकों को भूख से मुक्ति की गारंटी दी है।असम, कश्मीर, तेलंगाना में भी विशाल भारत ने सेवा और सम्बन्ध का अभियान शुरू किया।
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
मानवीय रिश्तों को मजबूत करते, भूख पीड़ितों की सेवा करते, कूड़ा बीनने वाले बच्चों एवं आदिवासी बच्चों को शिक्षित करते, वंचित एवं निराश्रित बच्चों का पालन पोषण करते, महिलाओं में नेतृत्व का विकास करते विशाल भारत संस्थान ने 33 वर्ष पूरे कर लिए। विशाल भारत संस्थान ने चिल्ड्रेन्स पार्लियामेंट, अनाज बैंक एवं चिल्ड्रेन्स बैंक जैसे अन्तर्राष्ट्रीय मॉडल दिए। सुभाष भवन जैसे घर की संकल्पना दी, जिसमें सभी जातियों एवं धर्मों के लोग एक साथ रहकर राष्ट्र निर्माण कर रहे हैं। आजादी के महानायक सुभाष चन्द्र बोस को परम पावन राष्ट्रदेवता की उपाधि के साथ विश्व के पहले सुभाष मन्दिर का निर्माण कराया। असम, कश्मीर एवं तेलंगाना में लोगों को जड़ों से जुड़ने के लिए अभियान चलाया। विशाल भारत संस्थान ने अपने स्थापना दिवस पर 105 वंचित समाज एवं निराश्रित महिलाओं का अनाज बैंक में खाता खोलकर भूख से मुक्ति की गारंटी दी।विशाल भारत संस्थान की सेवा के 33 वर्ष पूर्ण होने पर अनाज बैंक द्वारा युद्ध की विभीषिका में भूख की समस्या और अनाज बैंक की आवश्यकता विषयक संगोष्ठी एवं अनाज महावितरण कार्यक्रम का आयोजन लमही के सुभाष भवन में किया गया।
मुख्य अतिथि हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं रामपंथ के धर्म प्रवक्ता डॉ० कवीन्द्र नारायण, संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ० निरंजन श्रीवास्तव एवं अनाज बैंक के डिप्टी चेयरमैन ज्ञान प्रकाश जी ने सुभाष मन्दिर में पुष्प अर्पित किया एवं दीपोज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर 105 महिलाओं को तेल, नमक, मसाला, चावल, दाल, आटा मुख्य अतिथि ने वितरित किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ० कवीन्द्र नारायण ने कहा कि विशाल भारत संस्थान अनाज बैंक के जरिये वर्तमान के भूख संकट को हल करने में लगा है। वहीं शोध कार्य के जरिये भविष्य की समस्याओं को हल करने की योजना पर कार्य कर रहा है। देश सेवकों की फौज तैयार हो रही है, जो हर किसी को संकट में काम आने वाली है।अनाज बैंक के डिप्टी चेयरमैन ज्ञान प्रकाश ने कहा कि विभीषिका चाहे जो हो, भूख के संकट से गुजरना ही पड़ता है।संचालन डॉ० नजमा परवीन ने किया एवं धन्यवाद अनिल कुमार पाण्डेय ने दिया।




