गाजीपुरः इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना की याद में निकाला जुलूस
कई जिलों से आई अंजुमनों ने मातम किया, तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने अम्न और मोहब्बत पर जोर दिया
गाजीपुर। महमदपुर के कैथवलिया में इमाम हुसैन की चहेती बेटी जनाबे सकीना की याद में जुलूस निकाला गया। इमाम बारगाह उम्मे लैला बीबी महमदपुर मजलिस का आग़ाज़ तिलावते कुरान से किया गया। इसके बाद जनाब अशफ़ाक़ हुसैन उर्फ़ हसीन और उनके हमनवां ने सोज़ख्वानी और मर्सियाख्वानी की। बाद मर्सियाख्वानी शायर ताहिर ताज़मी और कैफ़ ग़ाज़ीपुरी ने की।
सोज़ख्वानी रांची से आए ज़ाकिर मौलाना तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने कहा कि अम्न और मोहब्बत आपसी भाईचारगी को क़ायमो दायम रखने के लिए सभी मानव समुदाय के लिए जरूरी है। अदमें तशद्दुद की सबसे बेहतरीन और उम्दा नज़ीर वाक़ये कर्बला में इमाम हुसैन ने पेश किया जहां प्यास के मुकाबले में पानी हारा हक़ से मुक़ाबला कर के बातिल हारा और खंजरों के मुक़ाबिल शहादत पेश करने वाले सर नोके नैज़ा पे बुलंद हो कर ताक़यामत तक के लिए सरफ़राज़ हुए।
तक़रीर के बाद शबीहे ताबूत जनाबे सकीना बिन्तुल हुसैन और अलम व ज़ुल्फ़िक़ार इमाम बारगाह उम्मे लैला बीबी से बरामद हुआ।अंजुमने हाओ मातमी मक़ामी एवं बैरूनी ने नौहाख्वानी और सीना ज़नी की मक़ामी अंजुमन में सबसे पहले मेज़बान अंजुमन, अंजुमन मोहम्मदिया मोहम्मदपुर के साहबे ब्याज जनाब ताजदार हुसैन उर्फ़ आसिफ़ ने अपनी पुरदर्द आवाज़ में जनाबे सकीना के मसाएब, नौहे के ज़रिए पेश किए।
अंजुमन मोहम्मदिया के बाद अंजुमन सज्जादिया मुस्तफ़ाबाद ग़ाज़ीपुर ने अपने दिल सोज़ अंदाज़ में नौहा और मातम पेश किया ।इसके बाद बनारस से आई हुई अंजुमन,अंजुमन ज़ैनबिया दोसीपुरा बनारस ने सलाम और नौहा पेश किया जिससे आये हुए तमाम मोमनीन के ईमान में ताजगी देखी गई । हसन पुर सुल्तानपुर से आई हुई एक और अंजुमन अंजुमन रिज़्विया हसन पुर सुल्तानपुर ने अपने मख़सूस अंदाज़ में बारगाहे बिन्तुल हुसैन में सलाम और नौहे का हदिया पेश करते हुए मोमनीन की आंखों को नम कर दिया।इसके बाद जलालपुर से आई हुई हिंदुस्तान की मशहूर-ओ-मारूफ़ अंजुमन अंजुमन जाफ़रिया क़दीम रजि मुस्तफ़ाबाद जलालपुर ने नौहा पढा और इनके दस्ते के मातम की धमक से ग़ाज़ीपुर की फ़िज़ा में लबबैक या हुसैन की सदा बुलंद हुई अक़ीदतमंदो के जन सैलाब ने कर्बला की याद आंसुओं का नज़राना पेश किया ।
अंजुमनों के नौहे और मातम के बाद ये इज़तेमा एक जुलूस की शक्ल में जन सैलाब के साथ उम्मे लैला बीबी के इमाम बारगाह से सदर इमाम बारगाह महमदपुर पहुचा जहां अलविदाई तक़रीर आज़मगढ़ से आए मौलाना सय्यद इब्ने हसन कहा कि इमाम हुसैन की चार साला बच्ची पर ढाओ गओ ज़ुल्मों सितम को इस अंदाज में पेश किया की हर आँखों से ज़ारो क़तार आंसू बहने लगे और इन अश्क़ से भरी हुई आँखों ने शबीहे जनाबे सकीना के दफ़्न के दिल सोज़ मंज़र की भी ज़ियारत की जिससे चश्मे अश्क़ दो बाला हो गए। निज़ामत जनाब नजीब इलाहाबादी ने किया। समापन लगभग महमदपुर के सदर इमामबारगाह पर हुआ।




