कानपुरः सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें मुस्लिम संगठन
वक्फ सम्पत्तियों की सुरक्षा के लिए गंभीरता से उठाएं कदम, जमीयत उलमा की बैठक में संगठन को और मजबूत करने पर चर्चा
कानपुर। जामिया महमूदिया अशरफुल उलूम, जामा मस्जिद अशरफबाद, जाजमऊ में जमीयत उलेमा सेंट्रल ज़ोन उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी, ज़िला अध्यक्षों व सचिवों और विभागों के संयोजकों की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।बैठक में राज्य महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी ने संगठन की सक्रियता और केंद्र के दिशा-निर्देशों पर सच्चे दिल से अमल करने की सलाह देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि इकाइयां केवल कागजों तक सीमित न रहें बल्कि ज़िला स्तर पर ज़मीनी काम नज़र आना चाहिए।
उन्होंने ज़िलों की ओर से रिपोर्टिंग की व्यवस्था को और अधिक मजबूत और समय पर पूरा करने की सख्त हिदायत दी।मौलाना ने कहा कि संगठनात्मक पद केवल नाम के लिए नहीं बल्कि सेवा की मांग करते हैं। उन्होंने ज़िला और प्रांतीय जिम्मेदारों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय इकाइयों से लगातार और मजबूत संपर्क बनाए रखें और सच्ची नीयत के साथ कौमी काम अंजाम दें।
संचालन करते हुए मुफ्ती ज़फर अहमद कासमी ने पिछली कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने ज़िला, तहसील और स्थानीय इकाइयों को ज़मीनी स्तर पर मजबूत और सक्रिय बनाने पर ज़ोर देते हुए साफ किया कि जब तक स्थानीय इकाइयां सक्रिय नहीं होंगी, केवल ज़िला स्तर की बैठकों से मनचाहे संगठनात्मक परिणाम हासिल नहीं किए जा सकते। उन्होंने ज़ोन के ’आदर्श ज़िलों’ के प्रदर्शन का यथार्थवादी जायज़ा लेते हुए सभी ज़िलों को केंद्र द्वारा तय किए गए मानकों पर 100 प्रतिशत खरा उतरने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा, आगामी प्रांतीय और केंद्रीय प्रबंधकारिणी की बैठकों के महत्व को उजागर करते हुए सदस्यों की भागीदारी के कानूनी नियम बताए और सभी ज़िला प्रभारियों को अगस्त महीने के अंत तक हर हाल में अपनी पूरी कार्य रिपोर्ट प्रांतीय कार्यालय में जमा करने का स्पष्ट निर्देश दिया।
राज्य उपाध्यक्ष प्रोफेसर सैयद मोहम्मद नुमान ने देशवासियों (बिरादरान-ए-वतन) के साथ साझा इतिहास को उजागर करने और युवाओं तक जमीयत का संदेश पहुंचाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने ज़िलों के बीच आपसी सहयोग का प्रस्ताव रखा ताकि दावती और सामाजिक कामों, विशेषकर सद्भावना मंच के दायरे को और अधिक व्यापक व प्रभावी बनाया जा सके।बैठक में एजेंडों पर विस्तार से विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से तय हुआ कि आदर्श और गैर-आदर्श सभी ज़िलों में स्थानीय और तहसील इकाइयों को नए सिरे से सक्रिय किया जाएगा। ज़िला अधिकारी नियमित रूप से अपनी अधीनस्थ इकाइयों का दौरा करेंगे ताकि निचले स्तर पर संगठन मजबूत हो। सामाजिक न्याय और कानूनी मार्गदर्शन के लिए ज़ोनल व ज़िला स्तर पर ‘जैम’ (JEM) कमेटियों का गठन तुरंत सुनिश्चित करने का फैसला किया गया। साथ ही, ‘सद्भावना मंच’ की स्थापना के लिए तय हुआ कि सभी ज़िले तय समय के भीतर कमेटियां बनाकर प्रांतीय कार्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे। वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उम्मीद पोर्टल पर उनके समय पर पंजीकरण के लिए हर ज़िले में सक्रिय लोगों की एक कमेटी बनाई जाएगी, जो राज्य व केंद्रीय निर्देशों की रोशनी में वक्फ के मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी। 1 अक्टूबर को बिजनौर में होने वाली प्रांतीय प्रबंधकारिणी की बैठक और अक्टूबर के अंत में दिल्ली में होने वाली केंद्रीय प्रबंधकारिणी की बैठक में ज़ोन के प्रतिनिधियों की शत-प्रतिशत और नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना बनाई गई। समाज सुधार व दीनी तालीमी बोर्ड के तहत अगले तीन महीने का विस्तृत लक्ष्य (टारगेट) तय किया गया, जिसके आधार पर स्थानीय स्तर पर काम शुरू किया जाएगा और उसकी नियमित रिपोर्टिंग की जाएगी।
बैठक की शुरुआत कारी मुजीबुल्लाह इरफानी की पवित्र कुरआन की तिलावत से हुई। मौलवी मोहम्मद ज़कवान ने तराना-ए-जमीयत और मौलाना अहमद सफवान ने नात व मनकबत का नज़राना पेश किया। बैठक अध्यक्ष की दुआ के साथ सफलतापूर्वक समाप्त हुई। इस मौके पर ज़ोनल संगठन सचिव मुफ्ती हिलाल अहमद कासमी सीतापुर आदि मौजूद रहे।




