अब दिलों में हैं शहीदे कर्बला ठहरे हुए..
शहर भर के हजारों ताजिये कतारों में पहुंचे कर्बला, ग्वालटोली में शिया अजादारों ने जंजीर, कमा और छूरी का मातम किया, यौमे आशूरा पर इमाम हुसैन की शहादत पर लोगों ने रोजा रखा, फातेहा कराया
कानपुर। यौमे आशूरा के मौके पर हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहर के विभिन्न स्थानों से ताजियों और अलम के जुलूस निकाले गए। सभी जुलूस अपनी-अपनी क्षेत्र की कर्बलाओं में पहुंचे। वहां पर उनको सुपुर्देखाक किया गया। लोगों ने रोजे भी रखे और घरों में फातेहा भी कराया। छोटी कर्बला (ग्वालटोली) और बड़ी कर्बला (नवाबगंज) में लाखों अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा।
हज़ारों की तादाद में अज़ादारों ने कर्बला पहुंचकर 72 प्यासे शहीदों की बारगाह में हाजिरी दी। छूरी, तलवार और जंजीरों से मातम किया। शहरभर से हज़ारों ताजिये इन कर्बलाओं में दफनाए गए। सैकड़ों अंजुमनों ने नौहे, सलाम और मातम के ज़रिए ग़म-ए-हुसैन को ताज़ा किया जिनमें अंजुमन मोईनउल मोमिनीन, रिज़विया, चश्मे कौसर, गुलदस्ते हैदरी, सक्काऐ हरम, पंजेतनी, अबूतराबिया, मजलूमिया, नासिरउल ईमान, फिरदौसिया, मोहम्मदी मोईनउल अज़ा, जाफरिया, शब्बीरिया, मासूमिया, औन ओ मोहम्मद और दर्जनों अंजुमनें शामिल रहीं।
अकीदतमंद पैदल, 2 व्हीलर, 4 व्हीलर और ट्रकों से कर्बलाओं में पहुंचे। कासिदे हुसैन व सुगरा ने बड़ी कर्बला में फातेहा दिलाया। अजादारों की सेवा के लिए जगह-जगह चाय, शर्बत और पानी के कैम्प लगाए गए। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में खिचड़ा, बिरयानी, ज़र्दा की दगों से 72 शहीदों को नज़्रें पेश की गईं। कुरआन की तिलावत, फातेहाख्वानी और मजलिसें पूरे दिन होती रहीं। शिया समुदाय ने यौमे आशूरा पर फाके रखकर शाम 4:30 बजे के बाद ही फाक़ा तोड़ा।
चमनगंज, बेकनगंज, दादा मिया चौराहे, कर्नलगंज, नई स़ड़क, जोगियाना, फहीमाबाद आदि स्थानों से ताजियों के जुलूस एक के बाद एक कतारों में सादगी के साथ ग्वालटोली मकबरा पहुंचे। वहां पर ताजियों को सुपुर्देखाक किया गया। बेगमपुरवा, बाबूपुरवा आदि क्षेत्रों में भी ताजियों के जुलूस निकाले गए। ईदगाह के पास ताजियों को सुपुर्देखाक किया गया। जाजमऊ, लाल बंगला, ओमपुरवा, छबीले पुरवा, टीला, मगदूम नगर आदि क्षेत्रों के ताजिये नई चुंगी होते हुए ईदगाह पहुंचे। वहां पर सभी ताजियों को सुपुर्देखाक किया गया।
शाम-ए-गरीबा की मजलिस
छोटी कर्बला (मकबरा)

में बिना फर्श, अंधेरे में मजलिसे शामे-गरीबा बरपा हुई। मौलाना सैफ़ अब्बास (लखनऊ) ने कर्बला के मंजर, हज़रत अब्बास, अली अकबर, क़ासिम, अली असगर की शहादतें बयान कीं। मजलिस के बाद मोमबत्ती, रोटियों से भरा थाल और मातम पेश किया गया।



