राम मंदिर में चंदा चोरी से लेकर रामपुर तक
नीट पेपर लीक, किसान सब्सिडी घोटाला, महंगाई, बेरोजगारी से घिरी सरकार को ‘आजम’ का सहारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा भी सोशल मीडिया पर छाया हाईकोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन की याचिका से पहले यूपी सरकार की कैवियट दाखिल, सपा विधायक ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा
कानपुर। नीट पेपर लीक से घिरी सरकार उबर नहीं पाई थी कि अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सामने आ गया। इस मामले ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर लीं। इसके अलावा महंगाई, भ्रष्टाचार, केंद्रीय मंत्री की किसान सब्सिडी घोटाला, कॉक्रोच जनता पार्टी का देश व्यापीय आंदोलन से एक्जिट का सहारा ‘आजम’ मिल गए हैं। रामपुर जिला प्रशासन के जरिये मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को निशाना बनाया जा रहा है। यूपी सरकार का वह विकास प्राधिकरण जो अपना निर्माण सही से नहीं करा पाता वह नक्शे पास न होने का बहाना बनाकर विश्वविद्यालय को बुलडोज करना चाहता है। आप लोगों ने देखा होगा कि अयोध्या में विकास प्राधिकरण के भवन की सीढ़ियां ढह गईं थीं। कई लोगों की जान जाने से बच गई थी।
डॉक्टर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने संविधान बनाया और इस संविधान में सभी नागरिकों को बराबरी का दर्जा दिया गया। केंद्र सरकार के नुमाइंदें हों या प्रदेश सरकार के सभी को पद संभालने से पहले संविधान के पालन और बिना राग द्वेष के काम करने की शपथ दिलाई जाती है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भी बिना पक्षपात काम करने की शपथ दिलाई जाती है। इसके बाद भी देश में प्रशासनिक अधिकारियों का रिकार्ड बहुत खराब है। इसीलिए वर्तमान में सारी संविधानिक संस्थाओं पर उंगली उठ रही हैं। बिना अदालती आदेश के किसी भी भवन पर बुल्डोजर चलाना प्रशासन का शगल बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन द्वारा किसी के भी भवन, प्रतिष्ठान पर बुल्डोजर चलाने के खिलाफ गाइड लाइन भी बनाई। इसके बाद भी प्रशासन पर सुप्रीम कोर्ट का भय नहीं रहा। हालत यह हुई भी फिर तमाम लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कर सभी हाईकोर्ट को अवमानना की सुनवाई करने का आदेश दिया है। जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया उसी दिन डीएम रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय की खूबसूरत इमारतों को नक्शा पास न होने पर बुल्डोज करने का अल्टीमेटम दे दिया। डीएम का आदेश आते ही सोशल मीडिया में यह मुद्दा छा गया। कोई भी इंसान कहीं भी पढ़ा लिखा हो लेकिन उसकी हमदर्दी हर विश्वविद्यालय, विद्यालय से होती है। क्योंकि यह शिक्षा के मंदिर सभी के लिए खुले रहते हैं। किसी भी इमारत का नक्शा पास न होने के भी नियम हैं। अगर कोई इमारत बन गई तो रामपुर विकास प्राधिकरण की टीम उसका सर्वे कर जुर्माना लगाकर नक्शा पास कर सकता है। कानपुर में केडीए द्वारा हमेशा खबरें आती हैं कि अमुक इमारत सील की गई। बाद में जुर्माना लेकर उसका नक्शा पास कर दिया गया। और जो इमारतें देखने में ही लग रही हैं कि मजबूत और नियम के तहत बनी हैं उन पर इस तरह की कार्रवाई की बात करना मन में संदेह पैदा करती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने तो अदालत में डीएम रामपुर के फैसले को चुनौती देने की बात कही है। सरकार की जल्दबाजी भी काबिले तारीफ है। सरकार ने हाईकोर्ट में कैवियट दाखिल कर दिया। ताकि स्टे से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या सभी सरकारी भवनों के नक्शे पास हैं। इसका भी जवाब सरकार और प्रशासन के पास नहीं होगा। लेकिन यह सब ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। देशभक्त लोगों की चिंता इस बात पर है कि इससे हमारे प्यारे देश की विदेशों में भी बदनामी हो रही है। विदेशों में नौकरी कर देश का विदेशी मुद्रा से खजाना भरने वाले लाखों कामगारों को जलील होना पड़ रहा है। अब आगे तो विश्वविद्यालय का मुद्दा अदालतों में गूंजेगा। लेकिन अभी तो जंतर मंतर में चल रहे प्रदर्शनकारियों का 20 को संसद कूच का मुद्दा छाया है। डीएम से एक्स पर सवाल पूछा था कि रामपुर में कितनी इमारतें बिना नक्शे की बनी हैं? इसका कोई जवाब नहीं आया।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग
कानपुर। समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र की विधायक नसीम सोलंकी एवं पूर्व विधायक इरफ़ान सोलंकी के नेतृत्व में राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के संबंध में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए अनुरोध किया गया कि इस प्रकार की किसी भी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा पूरे मामले का समाधान संविधान, कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संस्थान है। किसी भी कार्रवाई से पहले विद्यार्थियों के हितों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा शिक्षा के वातावरण को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई से बचा जाए।
प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप से विधायक नसीम सोलंकी , पूर्व विधायक इरफ़ान सोलंकी , वरिष्ठ नेता सरताज अनवर, छात्रसभा के प्रमुख महासचिव सिराज हुसैन, विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष वरुण जायसवाल , पार्षद इशरत अली , छात्रसभा के प्रदर्श सचिव अल्तमस सिद्दीक़ी, मुस्तफा फरुकी, मोबिन अहमद, साबिर खान , हाजी दिलशाद , हमज़ा फरुकी आदि मौजूद रहे।



