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वाराणसी

वाराणसी: गुलाब की खुशबू, सुरों की सरिता व बनारसी ठाट गुलाबबाड़ी

अजित पाण्डेय / वाराणसी। सात वार भी त्योहार वाले दुनिया के सबसे पुराने व सबसे निराले शहर बनारस में आज भी अपनी परम्पराओं व मान्यताओं को जीवन्त बनायें हुए है। इन्ही परम्पराओं में से एक है रस रंग की महकती संगीतवोत्सव “गुलाबबाड़ी’ की। बनारस की होली की मस्ती की अंतिम कड़ी ‘गुलाबबाडी’ में रंग अबीर गुलाल तो नहीं उड़ते पर गुलाब की पंखुड़ियों की बौछार, गुलाबजल की रिमझिम फुहार, चैती, दादरा, कजरी की मनमोहक बंदिशें, तानपुरे से निकलती मधुर अंकार, व गुलाब की सुगंध से सुवासित माहौल के बीच पारम्परिक बनारसी परिधानों में सजे-धजे, पुरूष सफेद कुर्ता पैजामा गुलाबी दुपट्टा व सिर पर दुपल्ली टोपी व महिलायें गुलाबी साड़ी, गुलाबी दुप‌ट्टा व सिर पर दुपल्ली टोपी पहनें जब बनारसी ठाट के साथ खुले आकाश के तले एकत्रित हो माथे पर चंदन का त्रिपुंड (तिलक), बनारसी ठंडई व बनारसी पान के साथ गीत-संगीत का आनंद लेते है तो मानो ऐसा लगता है बसन्त अपने सारे सौन्दर्य के साथ “गुलाबबाड़ी” मे उतर आया हो।

बनारसी ठाट का यह आयोजन इस वर्ष भारतीय जन जागरण समिति, द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2026, रविवार को सायं 5.15बजे, बनारस शहर के महमूरगंज में स्थित तुलसी उपवन में आयोजित किया गया। सभी अभ्यागत जनों का सम्मान संस्था के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा अंग वस्त्रम, टोपी व तिलक लगा कर किया गया। महिलाओं का स्वागत महिला अध्यक्ष श्रीमती कुमकुम श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ वरिष्ठ साहित्यकार डा. नीरजा माधव, प्रो. श्रद्धानंन्द, डॉ. कुमुद रंजन, डा. बेनी माधव जी एवं समिति के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व श्री अन्नपूर्णा ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम के बटुकों द्वारा मंगलाचरण से हुआ।

सुरमयी संध्या का आगाज संतोष कुमार ‘प्रीत’ के संयोजन में काव्यांजलि से हुआ। जिसमें काशी के सुप्रसिद्ध कवि आनन्द कृष्ण ‘मासूम’,बुद्धदेव तिवारी, फुर्तीला बनारसी, राम जतन पाल ‘सज्जन’, पंकज श्रीवास्तव, धीरेंद्र श्रीवास्तव व संतोष कुमार ‘प्रीत’ आदि ने अपना काव्यपाठ किया। हास्य व्यंग्य के साथ ही सन्देशपरक रचनाओ से कवियों ने सभी स्रोताओं को अविभूत कर दिया।कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पुस्कालयाध्यक्ष के0 एस0 परिहार ने व सफल संचालन आनन्द कृष्ण ‘मासूम’ के किया । तदोपरांत प्रसिद्ध गायक बाबुल श्रीवास्तव के संयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।जिसके अंतर्गत मनोहारी एकल तबला वादन – स्वरांश श्रीवास्तव एवं वैभव सिंह (बनारस घराना) द्वारा तथा गायन सुरसिद्ध सुगम संगीत कलाकार बाबुल श्रीवास्तव द्वारा किया गया। की बोर्ड पर श्री सतीश चंद्रा,तबला पर श्री शशि भूषण मिश्रा एवं पैड पर बृजेश प्रजापति ने अपनी संगति दी। अपनी प्रस्तुति से सभी कलाकारों ने स्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतिम प्रस्तुति बनारस घराने की उप शास्त्रीय संगीत की ख्यातिलब्ध गायिका श्रीमती सुचरिता गुप्ता के सुरों से हुई। इन्होने चैती, दादरा, कजरी सुना कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।  पूरे कार्यक्रम का संचालन स्वागताध्यक्ष डॉ0 बेनी माधव , व आभार समिति के महा सचिव मधुकर चित्रांश एवं उपाध्यक्ष आनंदकंद चौबे जी ने संयुक्त रूप से व्यक्त किया।कार्यक्रम में मुख्यरुप से मीडिया प्रभारी वी. के. सिंह ,डॉ0 निरंजन श्रीवास्तव, सुमन जायसवाल, राजेश श्रीवास्तव, बागेश्वरी प्रसाद,उमेश चंद जैन, बृजेश पांडेय, सरोजनी महापात्रा, रविन्द्र श्रीवास्तव, सरिता श्रीवास्तव, डॉ0 ओ पी शर्मा, डॉ कवींद्र श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

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