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International News यूएनएससी में भारत ने गिनाए अफगान नीति के 10 बड़े संकल्प

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी० हरीश ने अफगानिस्तान के गंभीर सुरक्षा व सामाजिक हालात पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में भारत का पक्ष बेहद आक्रामक और स्पष्ट तरीके से रखा है। बैठक के बाद राजदूत हरीश ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा कर भारत के बयान के 10 प्रमुख बिंदुओं की सूची जारी की, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान की जनता के लिए भारतीय मदद का लेखा-जोखा देने के साथ-साथ पाकिस्तान के पाखंड और छद्म एजेंडे को उजागर किया। भारतीय राजदूत द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, भारत ने सुरक्षा परिषद को बताया कि अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत के क्षमता निर्माण और मानवीय सहायता कार्यक्रम देश के सभी 34 प्रांतों में फैले हुए हैं। भारत वहां 500 से अधिक विकास भागीदारी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनका मुख्य ध्यान स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत ने प्राथमिक और तृतीयक दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बड़ी प्रगति की है। उन्होंने कहा इसके अलावा, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित अफगान नागरिकों की मदद करना और युवाओं को शिक्षा के अधिक अवसर देना, नशा मुक्ति कार्यक्रमों में सहायता और क्रिकेट के क्षेत्र में सहयोग करना अफगानिस्तान के भविष्य में भारत का निवेश है। हरीश ने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि भारत आज अफगान निर्यात का शीर्ष गंतव्य बन चुका है और इसके लिए भारत ने एक समर्पित ‘एयर फ्रेट कॉरिडोर’ (विमान माल ढुलाई गलियारा) विकसित किया है।’’ उन्होंने इसे पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर थोपे गए ‘ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म’ (व्यापार और पारगमन आतंकवाद) से बिल्कुल विपरीत बताया। भारत ने पड़ोसी देशों से लौटने वाले अफगान शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई।संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की रिपोर्टों का हवाला देते हुए भारतीय दूत ने सीमा पार से होने वाली हिंसा, हवाई हमलों और लक्षित हत्याओं में निर्दोष नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने पाकिस्तान पर सीधा हमला बोलते हुए कहा रमजान के पवित्र महीने में हवाई हमले कर निर्दोष महिलाओं और बच्चों को मारना और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की बड़ी-बड़ी बातें करना, पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण है। भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान सरकार द्वारा अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय आतंकी समूहों को “फिटना अल हिंदुस्तान” नाम देने की तीखी आलोचना की। उन्होंने इसे पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रायोजित ‘भ्रामक और झूठा प्रचार’ करार दिया, जिसे धार्मिक शब्दावली की आड़ में पेश करके पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का दोष पड़ोसियों पर मढ़ने की कोशिश कर रहा है। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद और मानवीय सहायता के मोर्चे पर उसका रुख अडिग और गैर-परक्राम्य है।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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